जंतर-मंतर पर देशभर से जुटेंगे लाखों शिक्षक: टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन आज

BY- PRAKHAR SHUKLA 


क्यों हो रहा है प्रदर्शन ?
दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोमवार को शिक्षकों का अब तक का सबसे बड़ा राष्ट्रीय प्रदर्शन होने जा रहा है। उत्तर प्रदेश सहित 22 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों के दस लाख से अधिक शिक्षक इस रैली में शामिल होकर अपनी एकता और ताकत का प्रदर्शन करेंगे। यह रैली शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के खिलाफ एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुकी है।


भारी संख्या में जंतर-मंतर पहुँचने लगे शिक्षक- 

विभिन्न जिलों से दिल्ली की ओर रवाना हुए शिक्षक रविवार रात से ही देशभर के अलग-अलग जिलों से शिक्षकों के समूह ट्रेन, बस और निजी वाहनों के माध्यम से दिल्ली के लिए निकल पड़े थे।दिल्ली से सटे जिलों के शिक्षक रविवार रात ही जंतर-मंतर पहुंच गए।दूरस्थ राज्यों से आने वाले शिक्षक सोमवार तड़के तक जंतर-मंतर पहुंचने लगेंगे।

आरटीई के पहले नियुक्त सभी शिक्षकों को दे विशेष छूट-

उत्तर प्रदेश से सबसे बड़ी संख्या में शिक्षक इस आंदोलन में भाग ले रहे हैं, जिसके चलते कई जिलों से लंबी बसों और वाहनों की कतारें दिल्ली की ओर बढ़ती दिखाई दीं। मुख्य मुद्दा टीईटी अनिवार्यता से पहले नियुक्त शिक्षकों को छूट की मांग शिक्षकों का मुख्य तर्क है कि आरटीई (Right to Education) लागू होने से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी अनिवार्यता से छूट दी जाए।


नियमों में बदलाव से पड़ रहा है सीधा असर- 

शिक्षकों का कहना है कि नियमों में अचानक बदलाव से उनके भविष्य, सेवा शर्तों और स्थिरता पर सीधा असर पड़ता है। कई शिक्षक वर्षों से सेवा दे रहे हैं, ऐसे में अचानक टीईटी की अनिवार्यता थोपना अव्यावहारिक और अनुचित है।सरकार को उनके अनुभव, पद और सेवा अवधि को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक समाधान देना चाहिए। इसलिए शिक्षक चाहते हैं कि संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार ऐसा अध्यादेश लाए, जिससे यह अनिवार्यता समाप्त हो सके या पूर्व नियुक्त शिक्षकों को छूट मिल सके।
 
क्या है इस रैली का प्रमुख उद्देश्य-

इस रैली का प्रमुख उद्देश्य यह है कि शिक्षकों को अपनी आवाज संसद तक पहुंचाना है, यह रैली लोकसभा सत्र के दौरान आयोजित की जा रही है ताकि शिक्षक अपनी बात प्रभावी ढंग से संसद तक पहुंचा सकें। जंतर-मंतर पर होने वाले इस बड़े प्रदर्शन में शिक्षक अपनी समस्याएँ,अनुभव, सुझाव और भविष्य की रणनीति साझा करेंगे। शिक्षक संगठनों का कहना है कि टीईटी अनिवार्यता न केवल शिक्षकों के करियर को प्रभावित करती है, बल्कि स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था पर भी असर डालती है। इसलिए यह आंदोलन केवल एक मांग नहीं, बल्कि शिक्षा प्रणाली में स्थिरता और सम्मान की लड़ाई है।

भविष्य की रणनीति पर होगी चर्चा-

इस प्रदर्शन के माध्यम से शिक्षक देशभर के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर आगे की रणनीति भी तय करेंगे।यदि सरकार उनकी मांगें नहीं मानती, तो आंदोलन को व्यापक स्वरूप दिया जा सकता है।शिक्षक संगठनों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं, लेकिन जरूरत होने पर वे आंदोलन को और भी बड़ा कर सकते हैं।

 

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