बच्चे और AI: अकेलापन मिटाने की डिजिटल दोस्ती
आज के समय में किशोर अकेलापन महसूस करने लगे हैं। बहुत से युवा दोस्त या परिवार से अपनी भावनाएँ साझा करने में हिचकिचाते हैं। ऐसे में कई टीनएजर्स ने AI‑चैटबॉट्स को अपना नया साथी बना लिया है। ये सिर्फ सवाल-जवाब के लिए नहीं, बल्कि अपनी भावनाओं और परेशानियों के लिए भी उन्हें सहारा देते हैं।
आंकड़े क्या कहते हैं
एक हालिया अध्ययन में पाया गया कि लगभग 2 में से 1 किशोर AI‑चैटबॉट्स से बातचीत करता है। कुछ इसे सलाह और मार्गदर्शन के लिए इस्तेमाल करते हैं, तो कुछ बस अकेलेपन दूर करने के लिए। लड़के लड़कियों की तुलना में थोड़ा ज्यादा इस डिजिटल दोस्ती की ओर बढ़ रहे हैं।
क्यों चुनते हैं AI
AI हमेशा उपलब्ध रहता है। आप जब चाहो बात कर सकते हो, कोई आलोचना नहीं होती और डर या शर्म महसूस नहीं होती। कई बार दोस्त या परिवार सुन नहीं पाते, या जवाब में नकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं। ऐसे में AI एक सुरक्षित और आरामदायक जगह प्रदान करता है।
फायदे और जोखिम
फायदे:
किशोर अपनी भावनाएँ बिना डर के साझा कर सकते हैं।
तुरंत प्रतिक्रिया मिलती है, किसी का इंतजार नहीं करना पड़ता।
अकेलेपन में यह एक साथी की तरह काम करता है।
जोखिम:
AI इंसान नहीं है। यह वास्तविक दोस्ती और संवेदनशीलता नहीं दे सकता।
लगातार इसके भरोसे रहने से अकेलापन और सामाजिक दूरी बढ़ सकती है।
निजी जानकारी साझा करने पर डेटा की सुरक्षा का सवाल भी खड़ा होता है।
क्या करना चाहिए
चैटबॉट का इस्तेमाल सीमित और उद्देश्य के लिए करें।
परिवार, दोस्तों और भरोसेमंद लोगों से बात करना प्राथमिकता बनाएं।
मानसिक स्वास्थ्य की जरूरत होने पर पेशेवर मदद लें।
स्कूल और समाज में सामाजिक गतिविधियों और दोस्ती को बढ़ावा दें।
AI‑चैटबॉट्स एक सहारा जरूर दे सकते हैं, लेकिन असली संवेदनशीलता और दोस्ती इंसानी रिश्तों में ही मिलती है। किशोरों को डिजिटल दोस्ती का फायदा उठाते हुए, असली दुनिया के संपर्क और बातचीत को न भूलना चाहिए।
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