बिहार के नए 'चौधरी' बने सम्राट

बिहार की राजनीति में लंबे इंतज़ार और कयासों के बाद आखिरकार तस्वीर साफ हो गई है। सत्ता के गलियारों में जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा थी, उसी पर मुहर लग गई—सम्राट चौधरी अब बिहार के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। विधायक दल की अहम बैठक में उन्हें सर्वसम्मति से नेता चुना गया, और अब वे राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।

15 अप्रैल की सुबह 11 बजे लोकभवन में भव्य शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा, जहां सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। उनके साथ दो उपमुख्यमंत्री भी शपथ लेंगे, जिससे नई सरकार का औपचारिक आगाज़ होगा।

यह बदलाव तब आया जब नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद मुख्यमंत्री पद खाली हो गया। पिछले हफ्ते उन्होंने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली थी, जिसके बाद से ही नए मुख्यमंत्री को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई थी। कई नामों पर चर्चा हुई, लेकिन अंततः बाज़ी सम्राट चौधरी के हाथ लगी।


कौन हैं सम्राट चौधरी?

16 नवंबर 1968 को जन्मे सम्राट चौधरी एक ऐसे राजनीतिक परिवार से आते हैं, जहां राजनीति सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि विरासत है। उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार के जाने-माने समाजवादी नेता रहे हैं, जो कभी लालू प्रसाद यादव के करीबी माने जाते थे। बाद में उन्होंने अपनी राजनीतिक दिशा बदली और नीतीश कुमार के साथ खड़े हो गए।

सम्राट चौधरी की शुरुआती शिक्षा-दीक्षा राजनीति के इसी माहौल में हुई। दिलचस्प बात यह है कि आज जिन लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव के खिलाफ वे मुखर रहते हैं, उन्हीं की पार्टी आरजेडी से उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। यानी सियासत के ‘क, ख, ग’ उन्होंने उसी पाठशाला में सीखे, जिसके अब वे प्रखर विरोधी हैं।

उनका निजी जीवन भी संतुलित है—पत्नी ममता कुमारी, एक बेटा और एक बेटी के साथ उनका परिवार पूर्ण है।


रिकॉर्ड बनाने वाला सफर

सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना सिर्फ एक राजनीतिक नियुक्ति नहीं, बल्कि इतिहास में दर्ज होने वाला क्षण भी है। वे बिहार के 24वें मुख्यमंत्री बनेंगे और साथ ही एक खास रिकॉर्ड भी अपने नाम करेंगे।

वे बिहार के दूसरे ऐसे नेता होंगे, जो पहले उपमुख्यमंत्री रहे और बाद में मुख्यमंत्री बने। उनसे पहले यह उपलब्धि सिर्फ कर्पूरी ठाकुर के नाम थी। सुशील कुमार मोदी, तार किशोर प्रसाद, विजय कुमार सिन्हा, तेजस्वी यादव और यहां तक कि बिहार के पहले उपमुख्यमंत्री अनुग्रह नारायण सिंह भी इस मुकाम तक नहीं पहुंच पाए।

अब सम्राट चौधरी ने उस खास सूची में अपना नाम दर्ज करा लिया है, जहां अब तक सिर्फ एक ही नाम था।


राजनीतिक सफर: कई मोड़ों से गुजरता हुआ

सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से की, फिर जनता दल यूनाइटेड (JDU) का दामन थामा, और अंततः भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए।

2014 में जब नीतीश कुमार ने जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया था, तब सम्राट चौधरी उनकी सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। यानी उन्होंने सत्ता और संगठन, दोनों में अलग-अलग भूमिकाएं निभाई हैं।


अब सबकी नजरें नई सरकार पर

अब जबकि सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं, बिहार की जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि वे राज्य को किस दिशा में ले जाएंगे। उनके सामने चुनौतियां भी होंगी और अवसर भी।

क्या वे अपने अनुभव और राजनीतिक समझ के दम पर बिहार को नई ऊंचाइयों तक ले जा पाएंगे? इसका जवाब आने वाला वक्त ही देगा।

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