नितिन नबीन की नई टीम में स्मृति ईरानी की धमाकेदार वापसी, ‘बैक सीट’ से सीधे फ्रंटफुट पर!

सात महीने के इंतजार के बाद बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया है। इस टीम में अनुभव, संगठन और चुनावी रणनीति तीनों का दिलचस्प मेल देखने को मिला है। 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, 8 महासचिव और 16 राष्ट्रीय सचिवों वाली इस टीम में कई बड़े नामों को अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं।

सबसे ज्यादा चर्चा अगर किसी नाम की है, तो वह है स्मृति ईरानी। 2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से हार के बाद स्मृति ईरानी भले ही चुनावी राजनीति में कुछ पीछे दिखाई दे रही थीं, लेकिन अब नितिन नबीन की टीम में राष्ट्रीय महासचिव बनकर उन्होंने जबरदस्त वापसी की है। यानी सियासत की जिस ‘बैक सीट’ पर वह पिछले कुछ समय से नजर आ रही थीं, वहां से अब उन्हें फिर सीधे फ्रंटफुट पर खेलने का मौका मिल गया है।

स्मृति ईरानी की राजनीतिक कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। 2003 में बीजेपी से जुड़ने के बाद उन्होंने संगठन में कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं। 2014 में अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़कर वह राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आईं। भले ही उस चुनाव में उन्हें हार मिली, लेकिन 2019 में उन्होंने इसी अमेठी सीट पर राहुल गांधी को हराकर बड़ा राजनीतिक उलटफेर कर दिया। इसके बाद मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री के तौर पर भी उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही।

2024 में अमेठी से हार के बाद माना जाने लगा कि स्मृति ईरानी फिलहाल सक्रिय चुनावी राजनीति से कुछ दूरी पर रहेंगी। लेकिन नितिन नबीन की नई टीम ने इस तस्वीर को बदल दिया है। राष्ट्रीय महासचिव के रूप में उनकी वापसी इस बात का संकेत है कि पार्टी अभी भी उनकी राजनीतिक क्षमता, आक्रामक तेवर और जनसंपर्क क्षमता पर भरोसा कर रही है।

वहीं, वसुंधरा राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा राम माधव समेत कई अनुभवी नेताओं को भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं मिली हैं। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि बीएल संतोष संगठन महासचिव के पद पर बरकरार हैं। अनिल बलूनी भी मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी संभालते रहेंगे।

कुल मिलाकर नितिन नबीन की टीम में बीजेपी ने पुराने अनुभवी चेहरों के साथ नए नामों को भी जगह दी है। लेकिन सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश शायद स्मृति ईरानी की वापसी से निकलता है।

अब सवाल यही है—क्या 2019 में अमेठी का ‘सियासी उलटफेर’ करने वाली स्मृति ईरानी एक बार फिर बीजेपी की चुनावी राजनीति में बड़ा असर दिखा पाएंगी?

क्योंकि इस बार उनके हाथ में चुनावी मैदान से पहले संगठन की बड़ी जिम्मेदारी है… और असली परीक्षा अब यहीं से शुरू होती है।

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