बहन दूर हो तो कौन बांधे भाई की कलाई पर राखी? जानें क्या कहती हैं परंपराएं
रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्यार और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि व अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती है। वहीं भाई भी बहन की रक्षा का संकल्प लेते हुए उसे उपहार देता है।
लेकिन कई बार दूरी, नौकरी, पढ़ाई या किसी अन्य वजह से बहन रक्षाबंधन के दिन भाई के पास नहीं पहुंच पाती। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भाई की कलाई पर राखी बांधने की रस्म अधूरी रह जाएगी? परंपराओं में इसके कुछ विकल्प बताए गए हैं।
बहन नहीं आ पाए तो कौन बांध सकता है राखी?
अगर सगी बहन किसी कारण से मौजूद नहीं है, तो परिवार की दूसरी महिला सदस्य भाई की कलाई पर राखी बांध सकती है। कई परिवारों में चचेरी, ममेरी या फुफेरी बहन से राखी बंधवाने की परंपरा देखने को मिलती है।
इसके अलावा कुछ घरों में बेटी, भतीजी या बुआ भी भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं। कुछ पारिवारिक परंपराओं में मां या भाभी द्वारा राखी बांधने की प्रथा भी मिलती है।
राखी बांधने से ज्यादा जरूरी है भावना
रक्षाबंधन का मूल भाव भाई-बहन के बीच स्नेह, विश्वास और एक-दूसरे के प्रति शुभकामना से जुड़ा है। इसलिए यदि सगी बहन किसी मजबूरी के कारण साथ नहीं है, तो परिवार की किसी अन्य महिला सदस्य से राखी बंधवाकर त्योहार की परंपरा निभाई जा सकती है।
हालांकि अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में रीति-रिवाज अलग हो सकते हैं। इसलिए यदि आपके परिवार में कोई विशेष परंपरा चली आ रही है, तो उसे प्राथमिकता देना उचित माना जाता है।
बहन दूर है तो ऐसे मनाएं रक्षाबंधन
अगर बहन दूसरे शहर या देश में रहती है, तो वह वीडियो कॉल के जरिए भाई के साथ रक्षाबंधन मना सकती है। बहन पहले से राखी भेज सकती है और भाई परिवार के किसी सदस्य की मदद से राखी बंधवा सकता है। इस तरह दूरी त्योहार की खुशी को कम नहीं करती।
आखिरकार रक्षाबंधन केवल कलाई पर बांधे जाने वाले धागे का नाम नहीं है, बल्कि यह भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम, अपनापन और विश्वास को मजबूत करने वाला पर्व है।
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