बेहट विधानसभा का राजनीतिक इतिहास: 2012 से 2022 तक बदलता जनादेश, जानिए कब कौन जीता

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में स्थित बेहट विधानसभा क्षेत्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह विधानसभा क्षेत्र सहारनपुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है और इसका विधानसभा क्रमांक 1 है। बेहट क्षेत्र की राजनीति में समय-समय पर अलग-अलग राजनीतिक दलों का प्रभाव देखने को मिला है। यहाँ के चुनावी परिणाम बताते हैं कि मतदाताओं ने किसी एक दल पर लगातार भरोसा करने के बजाय अलग-अलग चुनावों में अपना जनादेश बदला है।

बेहट विधानसभा क्षेत्र का वर्तमान स्वरूप वर्ष 2008 के परिसीमन के बाद सामने आया। इससे पहले इस इलाके का चुनावी इतिहास पुराने मुजफ्फराबाद विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा था। हालांकि परिसीमन के बाद विधानसभा क्षेत्र की सीमाओं और पहचान में बदलाव हुआ, इसलिए पुराने और नए चुनावों के परिणामों को समझते समय इस अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है। वर्तमान बेहट सीट पर पहला विधानसभा चुनाव वर्ष 2012 में हुआ।

2012 का विधानसभा चुनाव: बसपा के महावीर सिंह राणा की जीत
वर्ष 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बेहट सीट पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के उम्मीदवार महावीर सिंह राणा ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार नरेश ने उन्हें कड़ी चुनौती दी। मुकाबला इतना करीबी रहा कि दोनों उम्मीदवारों के बीच जीत का अंतर केवल 514 वोटों का था।

महावीर सिंह राणा को 70,274 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के नरेश को 69,760 वोट प्राप्त हुए। इस परिणाम ने स्पष्ट कर दिया कि बेहट में चुनावी मुकाबला काफी प्रतिस्पर्धी था और कुछ सौ वोट भी जीत-हार का फैसला कर सकते थे।

2017 का विधानसभा चुनाव: कांग्रेस के नरेश सैनी ने दर्ज की जीत
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में बेहट की राजनीतिक तस्वीर बदल गई। कांग्रेस के उम्मीदवार नरेश सैनी ने जीत हासिल की। पिछले चुनाव में बेहद कम अंतर से हारने वाली कांग्रेस ने इस बार अपना प्रदर्शन बेहतर किया।

नरेश सैनी को 97,035 वोट मिले, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के महावीर सिंह राणा को 71,449 वोट प्राप्त हुए। इस तरह नरेश सैनी ने 25,586 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। वर्ष 2012 में बसपा की ओर से जीतने वाले महावीर सिंह राणा इस बार भाजपा के उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में थे।

यह चुनाव बेहट की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव था। वर्ष 2012 में जहाँ बसपा ने जीत हासिल की थी, वहीं 2017 में कांग्रेस ने सीट पर कब्जा कर लिया।

2022 का विधानसभा चुनाव: समाजवादी पार्टी के उमर अली खान की जीत
वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बेहट सीट पर एक बार फिर बदलाव देखने को मिला। इस बार समाजवादी पार्टी (सपा) के उम्मीदवार उमर अली खान ने शानदार जीत दर्ज की। उनके सामने भाजपा के उम्मीदवार नरेश सैनी थे, जो पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर विजयी हुए थे।

निर्वाचन आयोग के परिणामों के अनुसार, उमर अली खान को कुल 1,34,513 वोट मिले, जबकि भाजपा के नरेश सैनी को 96,633 वोट प्राप्त हुए। उमर अली खान ने 37,880 वोटों के अंतर से जीत हासिल की।

इस चुनाव में बसपा के उम्मीदवार रायस मलिक को 45,075 वोट मिले। कांग्रेस की उम्मीदवार पूनम कंबोज को 1,632 वोट प्राप्त हुए। परिणामों से पता चलता है कि 2022 में सपा ने बेहट विधानसभा क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।

बेहट विधानसभा चुनावों का तुलनात्मक इतिहास


वर्तमान बेहट विधानसभा सीट के अब तक के तीन चुनावों के परिणाम इस प्रकार हैं:

 

2012: महावीर सिंह राणा — बहुजन समाज पार्टी (बसपा); जीत का अंतर 514 वोट।
2017: नरेश सैनी — भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस; जीत का अंतर 25,586 वोट।
2022: उमर अली खान — समाजवादी पार्टी; जीत का अंतर 37,880 वोट।


इन परिणामों से स्पष्ट है कि बेहट विधानसभा क्षेत्र में पिछले तीन चुनावों में तीन अलग-अलग राजनीतिक दलों ने जीत हासिल की। वर्ष 2012 में बसपा, 2017 में कांग्रेस और 2022 में सपा ने मतदाताओं का समर्थन प्राप्त किया।

परिसीमन से पहले का इतिहास
वर्ष 2008 के परिसीमन से पहले इस क्षेत्र का चुनावी इतिहास मुजफ्फराबाद विधानसभा सीट से संबंधित था। पुराने मुजफ्फराबाद क्षेत्र में भी विभिन्न राजनीतिक दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। वर्ष 2007 के चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार इमरान मसूद विजयी हुए थे, जबकि वर्ष 2002 और 1996 में जगदीश सिंह राणा ने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी।

पुराने मुजफ्फराबाद क्षेत्र के चुनावी परिणामों को वर्तमान बेहट सीट के परिणामों के साथ सीधे जोड़कर नहीं देखना चाहिए, क्योंकि परिसीमन के बाद निर्वाचन क्षेत्र की सीमाओं और पहचान में बदलाव हुआ था। फिर भी, ये पुराने परिणाम इस इलाके की राजनीतिक पृष्ठभूमि को समझने में मदद करते हैं।


बेहट विधानसभा क्षेत्र का चुनावी इतिहास लगातार बदलते राजनीतिक जनादेश की कहानी है। वर्ष 2012 में बसपा के महावीर सिंह राणा ने बेहद कम अंतर से जीत दर्ज की। वर्ष 2017 में कांग्रेस के नरेश सैनी ने बड़े अंतर से विजय हासिल की। इसके बाद वर्ष 2022 में समाजवादी पार्टी के उमर अली खान ने भाजपा के नरेश सैनी को 37,880 वोटों से हराकर विधानसभा सीट अपने नाम की।

इस प्रकार, बेहट विधानसभा की राजनीति में किसी एक दल का लगातार प्रभुत्व दिखाई नहीं देता। पिछले तीन चुनावों के परिणाम बताते हैं कि यहाँ मतदाताओं ने अलग-अलग समय पर अलग-अलग दलों को अवसर दिया है। आने वाले चुनावों में किस दल को समर्थन मिलेगा, यह मतदाताओं के फैसले और उस समय के राजनीतिक माहौल पर निर्भर करेगा।

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