सोने की कीमतों में आई सुनामी! 5 साल में पैसा हुआ 3 गुना, अब गिरावट में खरीदें या करें इंतजार?

 सोने की चमक ने पिछले पांच साल में निवेशकों की किस्मत बदल दी है। जिस सोने की कीमत नवंबर 2021 में करीब 47,600 रुपये प्रति 10 ग्राम थी, वही अक्टूबर 2026 के आखिर तक उछलकर 1.42 लाख रुपये के पार पहुंच गई। यानी महज पांच साल में निवेशकों का पैसा करीब तीन गुना हो गया। लेकिन अब तस्वीर थोड़ी बदली है। रिकॉर्ड तेजी के बाद सोने की कीमतों में जोरदार गिरावट देखने को मिली है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की आशंका ने सोने की चमक कुछ फीकी कर दी है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि क्या यह गिरावट सोना खरीदने का सुनहरा मौका है या अभी और सस्ता होने का इंतजार करना चाहिए? बाजार के जानकारों की मानें तो लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट एक बड़े मौके का दरवाजा खोल सकती है। कुछ एक्सपर्ट्स ने तो अगली धनतेरस तक सोने का भाव 1.80 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंचने का अनुमान भी जताया है।

पांच साल में सोने ने कर दिया मालामाल, 47 हजार से 1.42 लाख पहुंचा भाव
सोने ने पिछले पांच वर्षों में जिस रफ्तार से छलांग लगाई है, उसने बड़े-बड़े निवेश विकल्पों को पीछे छोड़ दिया है। दुनियाभर में आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों की ओर से लगातार सोने की खरीदारी और ब्याज दरों में बदलाव की उम्मीदों ने पीली धातु को जबरदस्त मजबूती दी।

एक्सिस डायरेक्ट के आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर 2021 में घरेलू बाजार में 10 ग्राम सोने की कीमत करीब 47,600 रुपये थी। अक्टूबर 2026 के आखिरी दिनों में यह बढ़कर लगभग 1,42,750 रुपये हो गई। इस तरह पांच साल में सोने ने करीब 200 फीसदी का रिटर्न दिया। सालाना चक्रवृद्धि दर (CAGR) के हिसाब से देखें तो यह रिटर्न करीब 24.53 फीसदी बैठता है।

यानी जिसने पांच साल पहले सोने में एक लाख रुपये लगाए थे, उसका निवेश बढ़कर करीब तीन लाख रुपये हो गया। यही वजह है कि सोना एक बार फिर निवेशकों के पसंदीदा विकल्पों में शामिल हो गया है।

इस साल सोने की रफ्तार क्यों पड़ी धीमी?
पांच साल के शानदार प्रदर्शन के बावजूद 2026 में सोने की चाल कुछ कमजोर नजर आई है। रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद कीमतों में आई गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया।

मोनार्क नेटवर्थ कैपिटल के आंकड़ों के अनुसार, 18 अक्टूबर 2025 को पिछली धनतेरस पर 24 कैरेट सोने की खुदरा कीमत करीब 1,30,860 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। वहीं धनतेरस 2026 से पहले यह कीमत लगभग 1,40,000 से 1,41,500 रुपये के बीच रही। यानी सालाना आधार पर बढ़त महज 7 से 8 फीसदी के आसपास रही।

इसके पीछे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें और बाजार में मुनाफावसूली जैसे कारक रहे। ऊंची ब्याज दरों की आशंका सोने पर दबाव बना सकती है, क्योंकि सोना खुद कोई ब्याज नहीं देता। हालांकि, जानकार मानते हैं कि यह कमजोरी लंबी अवधि की तेजी की कहानी को पूरी तरह खत्म नहीं करती।

धनतेरस 2026 पर सोना खरीदें या अभी रुक जाएं?
रिकॉर्ड स्तर से कीमतों में आई गिरावट ने निवेशकों के सामने एक बड़ा मौका खड़ा कर दिया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जिन लोगों से सोने की पिछली तेजी छूट गई थी, वे अब धीरे-धीरे अपने पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा सकते हैं।

हालांकि, बाजार में अभी भी उतार-चढ़ाव का जोखिम बना हुआ है। इसलिए एक साथ बड़ी रकम निवेश करने के बजाय किस्तों में खरीदारी करना बेहतर रणनीति हो सकती है।

एक्सिस डायरेक्ट का मानना है कि मौजूदा स्तरों से सोने में धीरे-धीरे निवेश करने वाले लंबी अवधि के निवेशकों को फायदा मिल सकता है। ब्रोकरेज के अनुमान के मुताबिक, अगली धनतेरस तक सोना 20 से 25 फीसदी तक रिटर्न दे सकता है। इसके लिए 10 ग्राम सोने का लक्ष्य 1,65,000 से 1,71,000 रुपये रखा गया है।

अगली धनतेरस तक 1.80 लाख रुपये हो सकता है सोने का भाव!
सोने को लेकर इससे भी ज्यादा उम्मीद एक्सिस डायरेक्ट की कमोडिटीज सीनियर रिसर्च एनालिस्ट देवेया गगलानी ने जताई है। उनका मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका के चलते सोने की कीमतों में अभी 5 से 8 फीसदी तक की अतिरिक्त गिरावट आ सकती है।

लेकिन इस संभावित गिरावट से घबराने की जरूरत नहीं है। गगलानी के मुताबिक, अगर वैश्विक तनाव कम होता है और महंगाई पर काबू पाया जाता है, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती की राह पर लौट सकता है। ऐसा होने पर सोने की कीमतों को बड़ा सहारा मिल सकता है।

उनकी सलाह है कि निवेशक मौजूदा निचले स्तरों पर एकमुश्त बड़ी रकम लगाने के बजाय धीरे-धीरे खरीदारी करें। उन्होंने अगली धनतेरस तक 10 ग्राम सोने की कीमत 1,65,000 से 1,80,000 रुपये तक पहुंचने का अनुमान जताया है।

सट्टेबाजी का बुलबुला फूटा, अब लंबी रेस के लिए तैयार सोना!
मोनार्क पीएमएस के असिस्टेंट फंड मैनेजर ध्रुव जोगलेकर भी सोने की लंबी अवधि की संभावनाओं को लेकर सकारात्मक हैं। उनका मानना है कि हालिया गिरावट ने बाजार में सट्टेबाजी के कारण बनी अतिरिक्त तेजी को काफी हद तक खत्म कर दिया है। इससे सोने की कीमतें अब ज्यादा आकर्षक स्तर पर आ गई हैं।

मोनार्क नेटवर्थ कैपिटल के वैल्यूएशन मॉडल के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की उचित कीमत 3,248 से 4,595 डॉलर प्रति औंस के दायरे में है। इसका मध्य स्तर करीब 3,922 डॉलर बैठता है। अक्टूबर में सोने का करीब 3,870 डॉलर प्रति औंस का निचला स्तर इसी अनुमानित दायरे में रहा।

ध्रुव जोगलेकर के मुताबिक, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा स्तर बाजार में एंट्री का एक आकर्षक मौका हो सकते हैं। उनका मानना है कि सट्टेबाजी का दबाव कम होने के बावजूद सोने को मजबूती देने वाले बुनियादी आर्थिक कारण अभी भी मौजूद हैं।

निवेशकों के लिए क्या है सही रणनीति?
सोने की कीमतों में आई गिरावट को देखकर जल्दबाजी में फैसला लेना ठीक नहीं होगा। एक्सपर्ट्स की राय से तीन अहम बातें निकलकर सामने आती हैं:

लंबी अवधि के निवेशक: एकमुश्त बड़ी रकम लगाने के बजाय अलग-अलग स्तरों पर किस्तों में सोना खरीदने पर विचार कर सकते हैं।
शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स: कीमतों में जारी उतार-चढ़ाव और अमेरिकी फेड के फैसलों को देखते हुए सतर्क रहें।
नए निवेशक: निवेश से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य, जोखिम उठाने की क्षमता और पोर्टफोलियो में सोने की मौजूदा हिस्सेदारी को जरूर देखें।
तो क्या अगली धनतेरस तक चमकेगा सोना?
पिछले पांच साल का रिकॉर्ड बताता है कि सोने ने लंबी अवधि में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। वहीं मौजूदा गिरावट ने बाजार में नई खरीदारी की संभावनाएं भी पैदा की हैं। एक्सपर्ट्स के 1.65 लाख से 1.80 लाख रुपये तक के अनुमान ने निवेशकों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं।

हालांकि, अमेरिकी ब्याज दरों, डॉलर की चाल, महंगाई और वैश्विक तनाव का असर आगे भी सोने की कीमतों पर पड़ सकता है। इसलिए 1.80 लाख रुपये का लक्ष्य एक अनुमान है, कोई गारंटी नहीं।

निवेश का असली मंत्र यही है कि सोने की चमक देखकर नहीं, बल्कि सही रणनीति और लंबी अवधि के नजरिये से फैसला लें।

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