राजभवन मार्च के बाद हिरासत से छूटे तेजस्वी, बोले- जेल से नहीं डरते, जारी रहेगी लड़ाई
पटना में छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर आरजेडी के प्रदर्शन ने बुधवार को उस समय नया मोड़ ले लिया, जब पार्टी के राजभवन मार्च को पुलिस ने रास्ते में रोक दिया। प्रदर्शन में पेपर लीक, बेरोजगारी और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। मार्च के दौरान स्थिति तनावपूर्ण होने के बाद पुलिस ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव समेत कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया।
तेजस्वी यादव के नेतृत्व में निकले इस मार्च में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए। प्रदर्शनकारी छात्रों से जुड़े सवालों को लेकर सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए राजभवन की तरफ बढ़ रहे थे। पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोकने के लिए बैरिकेड लगाए थे।
आगे बढ़ने को लेकर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनातनी की स्थिति बनी। कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ को पीछे हटाने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसी दौरान तेजस्वी यादव समेत कई लोगों को हिरासत में लिया गया।
हिरासत में लिए जाने के दौरान तेजस्वी यादव ने सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई से छात्रों और युवाओं के मुद्दों को उठाने का उनका अभियान रुकने वाला नहीं है। तेजस्वी ने कहा कि आंदोलन का मकसद सिर्फ किसी एक परीक्षा या घटना का विरोध करना नहीं है, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, पेपर लीक पर रोक और रोजगार जैसे व्यापक सवालों को उठाना है।
तेजस्वी यादव ने सरकार पर प्रदर्शन से घबराने का आरोप भी लगाया। उनका कहना था कि शांतिपूर्ण तरीके से छात्रों के सवालों को लेकर मार्च निकाला जा रहा था, लेकिन उसे रोकने के लिए पुलिस बल का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने साफ किया कि हिरासत या जेल की कार्रवाई उन्हें पीछे हटने के लिए मजबूर नहीं कर सकती।
वाटर कैनन के इस्तेमाल को लेकर भी तेजस्वी ने सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन को दबाने के लिए प्रशासन की ओर से सख्ती की जा रही है। उनका कहना था कि इस तरह की कार्रवाई से छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दे खत्म नहीं होंगे और आरजेडी इन सवालों को आगे भी उठाती रहेगी।
मार्च में आरजेडी सांसद मीसा भारती भी मौजूद रहीं। उन्होंने भी छात्रों, बेरोजगारी और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए। मीसा भारती ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए और कार्रवाई की जिम्मेदारी तय करने की मांग की।
उन्होंने यह भी दावा किया कि बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में छात्रों के खिलाफ एके-47 के इस्तेमाल से जुड़ी बात स्वीकार की है। मीसा भारती ने सवाल उठाया कि ऐसी कार्रवाई की अनुमति किस स्तर पर दी गई थी। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए।
फिलहाल तेजस्वी यादव और अन्य हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने छोड़ दिया है। हालांकि, इस घटनाक्रम के बाद छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर बिहार की सियासत में बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं।
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