7 साल बाद भी अधूरा ‘स्कायवॉक’ कल्याण के लोकग्राम पुल पर खतरे में रोज़ लाखों ज़िंदगियां

कल्याण - कल्याण के लोकग्राम इलाके में बना नया रेलवे पादचारी पुल आज भी यात्रियों के लिए बेकार साबित हो रहा है। पुल का निर्माण तो पूरा हो चुका है, लेकिन अब तक इसे रेलवे प्लेटफॉर्म से जोड़ा नहीं गया है, जिससे लाखों यात्रियों को रोज़ाना जान जोखिम में डालकर रेलवे ट्रैक पार करना पड़ रहा है।

7 साल से जारी परेशानी, कब मिलेगा राहत?
साल 2019 में पुराने पादचारी पुल को गिरा दिया गया था और उसकी जगह नया पुल बनाने का वादा किया गया था। लेकिन हकीकत यह है कि करीब 7 साल बीत जाने के बाद भी यह पुल पूरी तरह उपयोग के लिए तैयार नहीं हो पाया है। इस दौरान यात्रियों को रोज़ाना ट्रैक पार कर स्टेशन पहुंचना पड़ रहा है।
मालगाड़ियों के बीच जानलेवा सफर
पुल के नीचे से लगातार मालगाड़ियों की आवाजाही होती रहती है। ऐसे में यात्रियों को कई बार रुककर ट्रेन गुजरने का इंतजार करना पड़ता है। कई बार मालगाड़ी बीच ट्रैक पर रुक जाती है, जिससे रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है। मजबूरी में कुछ लोग ट्रेन के नीचे से गुजरने का जोखिम भी उठाते हैं—जो किसी भी समय बड़े हादसे में बदल सकता है।
अधिकारियों का दावा – “4 महीने में होगा कनेक्शन”
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, पुल को अगले चार महीनों में प्लेटफॉर्म नंबर 4-5 और 6-7 से जोड़ा जाएगा। हालांकि प्लेटफॉर्म 1A, 2 और 3 से इसे जोड़ना तकनीकी रूप से फिलहाल संभव नहीं बताया गया है।
कनेक्टिविटी पर बड़ा सवाल
पहले यह पुल एक बड़े फुटओवर ब्रिज से जुड़ा हुआ था, जिससे यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलती थी। लेकिन अब नया पुल उस पुराने ब्रिज से जुड़ेगा या नहीं, इस पर अधिकारी भी स्पष्ट जवाब नहीं दे पा रहे हैं।
सवाल यही है—जब सरकारें 5 साल में बदल जाती हैं, तो एक साधारण पादचारी पुल को पूरा होने में 7 साल क्यों लगते हैं?
और आखिर कब तक आम नागरिक अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करते रहेंगे?
फिलहाल, लोकग्राम का यह ‘अधूरा स्कायवॉक’ सिस्टम की धीमी रफ्तार और लापरवाही की कहानी बयां कर रहा है।

रिपोर्टर - साबीर शेख
 

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