बड़ा सवाल बालाजी एंटरप्राइजेज’ मद्य प्रकरण में जांच सिर्फ चालक पर ही क्यों रुकी? सप्लाई चेन पर पर्दा क्यों

ठाणे - जनवरी 2026 में खारघर में हुए शराब जब्ती प्रकरण में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आने के बावजूद जांच केवल चालक तक सीमित रहने पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उपलब्ध FIR, जब्ती पंचनामा, परिवहन दस्तावेज और बयानों से पूरी सप्लाई चेन का संकेत मिलता है—लेकिन क्या इस पूरी कड़ी की गहराई से जांच हुई है, इस पर अब भी स्पष्टता नहीं है।

खारघर में बड़ी कार्रवाई
3 जनवरी 2026 को खारघर सेक्टर 6 इलाके में उत्पाद शुल्क विभाग ने MH-05-FJ-8234 नंबर के वाहन को रोककर लगभग ₹7.94 लाख कीमत की विदेशी शराब जब्त की। जब्त माल में Blenders Pride, Royal Stag और Imperial Blue ब्रांड की बोतलें शामिल थीं। फील्ड टेस्ट में शराब की ताकत लेबल से कम (42.8% के बजाय करीब 30%) पाई गई, जिससे मिलावट की आशंका पैदा हुई। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष के लिए केमिकल एनालिसिस रिपोर्ट का इंतजार है।

वाहन, लाइसेंस और गोदाम का सीधा कनेक्शन
जब्त वाहन M/s Balaji Enterprises के नाम पर दर्ज बताया गया है। इसी कंपनी के पास FL-1 लाइसेंस (क्रमांक 140) है और भिवंडी तालुका के कोंगाव स्थित बॉन्डेड गोदाम से इसका संबंध सामने आता है। परिवहन पास, चालान और अन्य दस्तावेजों से यह सवाल उठता है लाइसेंसधारक वाहन में ‘अधिकृत रिकॉर्ड में दर्ज नहीं’ दो कार्टन कैसे पहुंचे?

 जांच के सबसे बड़े अनुत्तरित सवाल माल लोड किसने किया? गोदाम में प्रवेश किन लोगों को था? डिस्पैच की अनुमति किसने दी? स्टॉक का नियंत्रण किसके पास था? ये सवाल केवल चालक से पूछताछ कर हल नहीं हो सकते—पूरी सप्लाई चेन की जांच जरूरी है। सुबह 5:05 बजे संदिग्ध डिस्पैच चालक के बयान के अनुसार, गोदाम प्रबंधक के रूप में बताए गए राहुल सपकाले ने फोन पर माल भेजने के निर्देश दिए और सुबह 5:05 बजे वाहन रवाना हुआ। अगर यह डिस्पैच लाइसेंस समय के बाहर हुआ, तो अनुमति किसने दी? क्या इसकी एंट्री आधिकारिक रजिस्टर में दर्ज है? CCTV फुटेज गायब—संयोग या तकनीकी कारण? महत्वपूर्ण समय का CCTV फुटेज उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है।

संभावित कारण:

ऑटोमैटिक ओवरराइट तकनीकी खराबी सीमित स्टोरेज लेकिन असली सवाल यह है— क्या DVR/NVR की फॉरेंसिक जांच की गई?  खारघर से पहले 10 जगह डिलीवरी? चालक के अनुसार, वाहन ने घणसोली, कोपरखैरने, नेरुल और बेलापुर में कुल 10 वाइन शॉप्स पर डिलीवरी की।  क्या इन सभी जगहों की जांच हुई?  क्या समान बैच का माल वहां मिला? क्या सैंपल जांच के लिए लिए गए? कानूनी पहलू—क्या धारा 79 पर विचार हुआ? महाराष्ट्र प्रोहिबिशन एक्ट की धारा 79 के अनुसार, कर्मचारी या एजेंट की कार्रवाई के लिए लाइसेंसधारक भी जिम्मेदार हो सकता है—बशर्ते आवश्यक शर्तें और सबूत मौजूद हों। क्या जांच में इस पहलू को गंभीरता से परखा गया? केमिकल रिपोर्ट—केस का टर्निंग पॉइंट फिलहाल सबसे अहम सबूत अंतिम केमिकल एनालिसिस रिपोर्ट है।जब तक यह रिपोर्ट नहीं आती, तब तक “मिलावटी” या “जहरीली” शराब कहना जल्दबाजी होगी।

प्रशासन के सामने 15 बड़े सवाल

इस मामले में गोदाम निरीक्षण, स्टॉक ऑडिट, CCTV विश्लेषण, डिलीवरी पॉइंट जांच, लाइसेंस समीक्षा और चार्जशीट की स्थिति को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। निष्कर्ष: जांच सिर्फ चालक तक सीमित नहीं रहनी चाहिएइस मामले में एक स्पष्ट चेन नजर आती है— लाइसेंसधारक → गोदाम → डिस्पैच → वाहन → चालक → डिलीवरी पॉइंट → जब्ती इस पूरी कड़ी की जांच बेहद जरूरी है। फिलहाल किसी कंपनी, अधिकारी या व्यक्ति को दोषी साबित नहीं किया गया है। लेकिन उपलब्ध दस्तावेज यह संकेत देते हैं कि जांच का दायरा बढ़ाने की आवश्यकता है। यह रिपोर्ट उपलब्ध दस्तावेजों पर आधारित है और किसी को दोषी नहीं ठहराती। अंतिम सच्चाई केमिकल रिपोर्ट, आधिकारिक जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।


रिपोर्टर - साबीर शेख
 

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