ऐसी शादी कभी नहीं देखी होगी! बारातियों का अनोखा किस्सा
आज शादी-ब्याह का नाम आते ही DJ की तेज आवाज, चमचमाती गाड़ियां और बारातियों की लंबी कतार आंखों के सामने आ जाती है। दूल्हा खास गाड़ी में बैठकर निकलता है और बारात में शामिल लोग भी आराम से अपनी गाड़ियों में सफर करते हैं। लेकिन जमाना हमेशा से ऐसा नहीं था। एक वक्त था, जब बारात बैलगाड़ी से निकलती थी। रास्ते में नदी मिल जाए तो बारातियों को उतरकर गाड़ी धक्का देना पड़ता था। उस दौर की शादियों में परेशानियां कम नहीं थीं, लेकिन उनसे जुड़ी यादें आज भी लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला देती हैं।
बिहार के जमुई जिले के रहने वाले 80 वर्षीय कैलाश सिंह ने भी पुराने जमाने की बारात का ऐसा ही एक किस्सा सुनाया, जिसे सुनकर कोई हैरान रह जाए। उन्होंने बताया कि उनके बड़े भाई अर्जुन सिंह की शादी में बारात के साथ एक ऐसी घटना हुई थी कि जिस शख्स को दूल्हे के साथ जाना था, वह अस्पताल पहुंच गया। करीब 20 किलोमीटर के सफर में हुआ यह हादसा आज भी उन्हें याद है।
बैलगाड़ी पर चढ़ना पड़ा भारी, पहिया पेट के ऊपर से गुजर गया
कैलाश सिंह के मुताबिक, उनके बड़े भाई अर्जुन सिंह की बारात जमुई जिले के खैरा से सोनो जा रही थी। दोनों जगहों के बीच करीब 20 किलोमीटर की दूरी है। उस समय बारात में 40 से 50 लोग शामिल थे और सभी बैलगाड़ियों के सहारे शादी में जा रहे थे। न गाड़ियों का लंबा काफिला था और न आज जैसी सुविधाएं। बारात अपने पुराने अंदाज में आगे बढ़ रही थी।
इसी दौरान गांव का एक व्यक्ति बैलगाड़ी पर चढ़ने की कोशिश करने लगा। वह गाड़ी के पहिए के पास बने धूरे के सहारे ऊपर चढ़ रहा था। तभी पीछे से किसी ने बैल की पीठ पर हाथ रख दिया। इससे बैल अचानक बिदक गया और बैलगाड़ी तेजी से आगे भागने लगी।
बैलगाड़ी की रफ्तार बढ़ते ही पहिए के पास चढ़ रहा व्यक्ति अपना संतुलन खो बैठा और नीचे गिर पड़ा। इसके बाद बैलगाड़ी का पहिया उसके पेट के ऊपर से गुजर गया। बारात में अचानक अफरा-तफरी मच गई। जिस व्यक्ति को शादी में शामिल होना था, उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा। कैलाश सिंह बताते हैं कि घायल व्यक्ति का करीब सात दिनों तक इलाज चला।
इस तरह शादी में शामिल होने निकला एक बाराती रास्ते में ही अस्पताल पहुंच गया। आज के दौर में यह घटना किसी फिल्म के दृश्य जैसी लग सकती है, लेकिन उस समय ऐसी परेशानी पूरे परिवार और बारातियों के लिए चिंता का कारण बन जाती थी।
नदी मिलते ही रुक जाती थी बारात, फिर सबको लगाना पड़ता था जोर
पुराने जमाने में बारात का सफर केवल इतना ही मुश्किल नहीं था। रास्ते में नदी आ जाए तो आगे बढ़ना भी किसी चुनौती से कम नहीं होता था। कैलाश सिंह बताते हैं कि उस समय कई जगहों पर नदियों के ऊपर पुल नहीं बने थे। ऐसे में बैलगाड़ियों को नदी के पानी से होकर ही पार जाना पड़ता था।
नदी में रेत ज्यादा होने पर बैलगाड़ी के पहिए धंस जाते थे। फिर बारातियों को नीचे उतरना पड़ता था और सभी मिलकर गाड़ी को धक्का लगाते थे। कई बार परेशानी इतनी बढ़ जाती थी कि बैलों को गाड़ी से खोलना पड़ता था। इसके बाद लोग मिलकर बैलगाड़ी को कंधे पर उठाते और नदी के पार ले जाते थे।
सोचिए, आज जहां बाराती गाड़ी में बैठकर आराम से शादी समारोह तक पहुंच जाते हैं, वहीं उस दौर में शादी तक पहुंचने के लिए लोगों को रास्ते में ही खूब मेहनत करनी पड़ती थी। फिर भी बारात निकलती थी और लोग पूरे उत्साह के साथ उसमें शामिल होते थे।
घर-घर से मांगे जाते थे बैल, तब जाकर निकलती थी बारात
कैलाश सिंह बताते हैं कि उस समय गांवों में खेती के लिए बैल पाले जाते थे। जब किसी के घर शादी होती थी, तो बारात ले जाने के लिए आसपास के लोगों से बैल मांगे जाते थे। इन्हीं बैलों को बैलगाड़ी में जोतकर बारात निकाली जाती थी।
आज शादी में गाड़ियों की सजावट, DJ और दूसरी व्यवस्थाओं पर खास ध्यान दिया जाता है। उस समय साधन कम थे, लेकिन गांव के लोग एक-दूसरे की मदद के लिए आगे आते थे। किसी के घर शादी हो तो बैल देने से लेकर बारात की तैयारी तक, गांव के लोग मिलकर साथ निभाते थे।
कैलाश सिंह के लिए ये किस्से सिर्फ पुरानी घटनाएं नहीं हैं, बल्कि उनके जीवन की ऐसी यादें हैं, जिन्हें वह आज भी नहीं भूले हैं। उनके मुताबिक, आज सुविधाएं बहुत बढ़ गई हैं, लेकिन पुराने समय में लोगों को जिस तरह की खुशी और सुकून मिलता था, वह अब कम देखने को मिलता है।
बैलगाड़ी से निकलने वाली बारात में रास्ते की मुश्किलें थीं, हादसों का डर था और सफर भी आसान नहीं था। फिर भी उन दिनों की यादें आज बुजुर्गों के पास किस्सों के रूप में जिंदा हैं। यही वजह है कि कैलाश सिंह की यह कहानी पुराने जमाने की शादियों की एक ऐसी तस्वीर दिखाती है, जहां कम साधनों के बीच भी लोग मिल-जुलकर खुशियां मनाते थे।

No Previous Comments found.