राधारमण : जहाँ विग्रह मुस्कुराता है और मौन बोल उठता है

वृंदावन की पवित्र गलियों में एक ऐसा विग्रह विराजमान है, जो केवल देखा नहीं जाता — बल्कि अनुभव भी किया जाता है।
वह हैं श्री राधारमण, जो मुस्कुराते हैं… और वो भी वर्तमान क्षण में।
लोग उन्हें पत्थर कहते हैं, मूर्ति मानते हैं। लेकिन फिर… उनकी मुस्कान बदल जाती है।
कभी शरारती, कभी शांत। उनके हाथ, जो अनादि काल से विग्रह में स्थिर हैं, कभी-कभी मानो हल्के से हिलते हैं। और यह केवल आस्था की बात नहीं — गोसाइयों के कैमरे ने इन क्षणों को कैद भी किया है। तस्वीरें गवाही देती हैं कि वह केवल विग्रह नहीं, सजीव प्रभु हैं।
राधारमण की सेवा पूजा नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा है। जैसे कोई प्रियजन हो — जिन्हें सुबह जगाया जाता है, भोजन कराया जाता है, सजाया जाता है और रात्रि में विश्राम दिया जाता है।
और जब मंदिर में दीपक की लौ मंद होती है और शांति गहरी होती है, तब उनका चेहरा और भी बोल उठता है। उनकी मुस्कान ज़रा और गहरी हो जाती है, उनकी दृष्टि और पैनी — मानो सीधे आपके हृदय को पढ़ रही हो।
अज्ञानी के लिए वह पत्थर हैं,
जिज्ञासु के लिए रहस्य,
लेकिन भक्त के लिए —
वह राधारमण हैं… वह प्रभु, जो विग्रह में भी साँस लेते हैं और मौन में भी मुस्कुराते हैं।
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