हेल्दी प्रेग्नेंसी के लिए थाइरॉइड का संतुलन क्यों ज़रूरी है
थाइरॉइड ग्रंथि हमारे शरीर की ऊर्जा, मेटाबॉलिज्म और हार्मोनल बैलेंस को नियंत्रित करती है। खासकर महिलाओं के लिए, थाइरॉइड का स्तर प्रजनन स्वास्थ्य (fertility) और गर्भावस्था में बच्चे के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
1. थाइरॉइड हार्मोन और प्रजनन स्वास्थ्य
असंतुलित थाइरॉइड: अगर थाइरॉइड कम (Hypothyroidism) या ज्यादा (Hyperthyroidism) है, तो मासिक धर्म चक्र प्रभावित हो सकता है।
अंडाशय का असर: थाइरॉइड हार्मोन अंडाशय (Ovary) और अंडाणु (Egg) के विकास को प्रभावित करते हैं, जिससे गर्भधारण मुश्किल हो सकता है।
2. गर्भावस्था पर असर
पहले 3 महीने: शुरुआती गर्भावस्था में बच्चे का मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र मां के थाइरॉइड हार्मोन पर निर्भर करता है।
जटिलताएँ: कंट्रोल न किए गए थाइरॉइड से मिसकैरेज, प्रीक्लेम्पसिया, प्री-टर्म डिलीवरी और बच्चे में जन्मजात समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
3. थाइरॉइड क्यों जांचें?
ब्लड टेस्ट: TSH, T3, T4 लेवल चेक करना सबसे आसान तरीका है।
सही डोज़: अगर थाइरॉइड का इलाज चल रहा है, तो डॉक्टर सही दवा और डोज़ निर्धारित कर सकते हैं ताकि गर्भावस्था सुरक्षित रहे।
4. सलाह
बच्चे की योजना से कम से कम 3-6 महीने पहले थाइरॉइड का लेवल चेक कराएँ।
अपने डॉक्टर की निगरानी में दवा लें और नियमित फॉलो-अप करें।
हेल्दी डाइट और जीवनशैली अपनाएँ, क्योंकि यह थाइरॉइड को संतुलित रखने में मदद करती है।
थाइरॉइड का संतुलन बच्चे की योजना से पहले जरूरी है ताकि मां और बच्चे दोनों की सेहत सुरक्षित रहे। सही समय पर जांच और उपचार से गर्भावस्था में जोखिम कम होता है और स्वस्थ बच्चे के जन्म की संभावना बढ़ती है।

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