सभी जैन मंदिरों में होंगे विशेष आयोजन, भगवान की साक्षी में बांधा जाएगा रक्षासूत्र
टीकमगढ़ - जैन समाज में रक्षाबंधन पर्व को लेकर शहर के सभी जैन मंदिरों में तैयारियां हुए पूरी जैन समाज में रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का पर्व नहीं,बल्कि देश,धर्म,संस्कृति,समाज एवं साधु-संतों की रक्षा का संकल्प लेने का पावन अवसर माना जाता है। इसे जैन परंपरा में ‘धर्म रक्षा का पर्व’ भी कहा जाता है। धर्म प्रभावना समिति के अध्यक्ष नरेंद्र जनता ने बताया कि रक्षाबंधन के दिन श्रद्धालु प्रातःकाल जिनालय पहुंचकर भगवान की साक्षी में रक्षासूत्र बांधते हैं। इस अवसर पर सभी जैन मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन होंगे और श्रद्धालु धर्म एवं संस्कृति की रक्षा का संकल्प लेंगे।
700 मुनियों की रक्षा की स्मृति से जुड़ा है पर्व
जैन मान्यता के अनुसार प्राचीन काल में हस्तिनापुर में अकंपनाचार्य सहित 700 जैन मुनियों पर उपसर्ग किया गया था। दो दुष्ट मंत्रियों ने क्रोधवश मुनियों को आग और धुएं से घेरकर कष्ट पहुंचाने का प्रयास किया। संकट की जानकारी मिलने पर मुनि विष्णु कुमार वहां पहुंचे और अपनी विशुद्ध ऋद्धि एवं तपस्या के प्रभाव से वामन रूप धारण कर राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी। दो पगों में उन्होंने स्वर्ग और मनुष्य लोक को नाप लिया। तीसरे पग के लिए स्थान नहीं बचने पर राजा और दुष्ट मंत्रियों को अपनी भूल का एहसास हुआ। उन्होंने मुनियों पर हो रहे अत्याचार को बंद कर क्षमा मांगी और मुनियों की रक्षा हुई।
खीर एवं मिष्ठान्न से कराया गया आहार
मुनियों पर आया संकट दूर होने के बाद श्रावकों ने मुनियों को श्रद्धापूर्वक खीर एवं मिष्ठान्न का आहार कराया। इसी पावन घटना की स्मृति में रक्षासूत्र बांधने की परंपरा प्रारंभ होने की मान्यता है, जो आज भी जैन समाज में श्रद्धा एवं आस्था के साथ निभाई जाती है। रक्षाबंधन के दिन श्रद्धालु जिनालय पहुंचकर भगवान की पूजा-अर्चना करते हैं और रक्षासूत्र बांधते हैं। घरों में खीर एवं विभिन्न प्रकार की मिठाइयां बनाकर परिवारजनों और समाज के लोगों को प्रेमपूर्वक खिलाने की परंपरा भी है।
धर्म और संस्कृति की रक्षा का लिया जाएगा संकल्प
नरेंद्र जनता ने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का पर्व नहीं,बल्कि धर्म,संस्कृति,समाज और साधु-संतों की रक्षा के संकल्प का पावन पर्व है। यह पर्व त्याग,तप,करुणा,क्षमा और धर्म रक्षा की प्रेरणा देता है। रक्षाबंधन को लेकर जैन समाज में विशेष उत्साह है। शहर के सभी जिनालयों में श्रद्धालु धार्मिक भावनाओं के साथ पर्व मनाएंगे तथा भगवान की साक्षी में धर्म एवं संस्कृति की रक्षा का संकल्प लेंगे।
रिपोर्टर - राजेन्द्र कुमार श्रीवास्तव
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