तिलक नगर विवाद: मंत्री प्रवेश वर्मा के वायरल थप्पड़ कांड पर गरमाई राजनीति

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के तिलक नगर इलाके में सड़क निरीक्षण के दौरान दिल्ली सरकार के पीडब्ल्यूडी (PWD) मंत्री प्रवेश वर्मा और आम आदमी पार्टी (AAP) के स्थानीय विधायक जरनैल सिंह के समर्थकों के बीच हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस घटना का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें मंत्री प्रवेश वर्मा एक स्थानीय युवक को थप्पड़ मारते हुए नजर आ रहे हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले को लेकर अब तक दिल्ली पुलिस के पास कुल पांच शिकायतें पहुंच चुकी हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि पुलिस ने अभी तक इस मामले में कोई भी एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की है।

क्या है पूरा मामला और पुलिस के पास कितनी शिकायतें पहुंचीं?

दिल्ली पुलिस के अनुसार, इस पूरे विवाद को लेकर कुल 5 शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। इनमें से एक शिकायत जरनैल सिंह के करीबी सहयोगी साहिब सिंह (थप्पड़ खाने वाले युवक) की तरफ से दी गई है, दो शिकायतें पीडब्ल्यूडी के कर्मचारियों द्वारा आप विधायक और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज कराई गई हैं, जबकि दो शिकायतें बीजेपी कार्यकर्ताओं की ओर से मंत्री प्रवेश वर्मा के साथ दुर्व्यवहार किए जाने के आरोप में दी गई हैं। ये सभी शिकायतें विकासपुरी और तिलक नगर थाने में सौंपी गई हैं, और पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है। हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अब तक किसी भी पक्ष की शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।

दूसरी ओर, इस घटना के बाद से आम आदमी पार्टी आक्रामक रुख अपनाए हुए है। आप नेताओं ने तिलक नगर में जमकर प्रदर्शन किया और मंत्री की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की है। वहीं, मंत्री प्रवेश वर्मा ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया है कि आप कार्यकर्ताओं और विधायक के समर्थकों ने उनके परिवार के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और दुर्व्यवहार किया। इसके साथ ही उन्होंने आप विधायक पर सड़क परियोजनाओं में कमीशन मांगने के गंभीर आरोप भी लगाए हैं।

वीआईपी कानूनों पर उठ रहे गंभीर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम के बाद देश की राजधानी में कानून व्यवस्था और वीआईपी कल्चर को लेकर तीखे सवाल खड़े होने लगे हैं:

कानून सबके लिए बराबर क्यों नहीं?

आम नागरिकों के मामले में पुलिस तुरंत सख्त धाराओं में मुकदमे दर्ज कर लेती है, लेकिन एक कैबिनेट मंत्री के खिलाफ कई शिकायतें और स्पष्ट वीडियो सबूत होने के बावजूद अभी तक एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई है? क्या वीआईपी लोगों के लिए कानून के नियम अलग होते हैं?

सरेआम मारपीट पर पुलिस की सुस्ती क्यों?

यदि किसी आम नागरिक ने सार्वजनिक रूप से इस तरह किसी के साथ मारपीट या थप्पड़ कांड किया होता, तो उसे अब तक गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया जाता। ऐसे में सत्ता में बैठे रसूखदार नेताओं पर कार्रवाई करने से प्रशासन क्यों हिचकिचा रहा है?

सवालों के घेरे में पुलिस की निष्पक्षता: जब वीडियो में घटना साफ-साफ कैद है और दोनों पक्षों की तरफ से गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, तब भी पुलिस का यह कहना कि 'अभी तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है', सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र पर राजनीतिक दबाव और वीआईपी संरक्षण की ओर इशारा करता है।

जनता और राजनीतिक गलियारों में अब यही चर्चा है कि क्या देश में कानून का राज केवल आम आदमी के लिए है, और क्या सत्ताधारी दल के मंत्रियों और नेताओं पर कानून के हाथ हमेशा कमजोर पड़ जाते हैं?

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