TMC के नाम और सिंबल पर चुनाव आयोग का बड़ा फैसला ,नंदीग्राम-रेजीनगर उपचुनाव से पहले दोनों गुटों को नई पहचान
AKANSHA UPADHYAY
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद पर चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश जारी कर दिया है। उपचुनाव से ठीक पहले आयोग ने बड़ा कदम उठाते हुए फिलहाल “ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस” नाम और पार्टी के आरक्षित “फूल-घास” चुनाव चिह्न को फ्रीज कर दिया है। यानी अंतिम फैसला आने तक दोनों में से कोई भी गुट इस नाम और सिंबल का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा।
चुनाव आयोग के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस में दो प्रतिद्वंद्वी गुट सामने आए हैं। एक गुट का नेतृत्व ममता बनर्जी कर रही हैं, जबकि दूसरे गुट की अगुवाई अरूप रॉय कर रहे हैं। दोनों पक्ष पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अपना दावा कर रहे हैं।इस विवाद पर आयोग अंतिम फैसला चुनाव चिह्न आदेश के पैरा 15 के तहत करेगा। लेकिन उससे पहले पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा उपचुनाव को देखते हुए आयोग ने अंतरिम व्यवस्था लागू की है।अंतरिम आदेश के तहत फिलहाल कोई भी गुट “ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस” नाम का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। इसके साथ ही पार्टी का आरक्षित “फूल-घास” चुनाव चिह्न भी दोनों गुटों के लिए फ्रीज रहेगा।यानी उपचुनाव में दोनों पक्षों को अलग नाम और अलग चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतरना होगा।
आयोग ने दोनों गुटों को निर्देश दिया है कि वे अपने लिए तीन-तीन नामों के विकल्प, वरीयता क्रम में, आयोग को दें। इसके अलावा तीन-तीन फ्री सिंबल के विकल्प भी देने होंगे। इन विकल्पों में से आयोग प्रत्येक गुट के लिए एक नाम और एक चुनाव चिह्न आवंटित करेगा।दोनों गुटों को यह प्रक्रिया 18 सितंबर 2026 की सुबह 11 बजे तक पूरी करनी थी।आयोग की अंतरिम व्यवस्था के मुताबिक दोनों गुट चाहें तो अपने नए नाम में तृणमूल कांग्रेस से जुड़ा कोई संदर्भ भी रख सकते हैं। मसलन, गुट की अलग पहचान बताने वाला नाम इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन मूल पार्टी के आरक्षित नाम और चुनाव चिह्न का इस्तेमाल अंतिम आदेश तक नहीं होगा।
जानकारी के लिए बता दें कि चुनाव आयोग का यह आदेश इसलिए भी अहम है क्योंकि पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होने हैं। इन चुनावों में दोनों गुट तृणमूल कांग्रेस की पहचान के साथ उतरने की तैयारी कर रहे थे। लेकिन अब अंतरिम आदेश के बाद दोनों पक्षों को अलग चुनावी पहचान के साथ मैदान में उतरना होगा।हालांकि, आयोग का यह फैसला अभी अंतिम नहीं है। आयोग ने साफ किया है कि पार्टी के नाम और मूल चुनाव चिह्न पर अंतिम निर्णय पैरा 15 के तहत होने वाली प्रक्रिया पूरी होने के बाद किया जाएगा।इसका मतलब साफ है—फिलहाल उपचुनाव के लिए दोनों गुटों की पहचान अलग होगी, लेकिन तृणमूल कांग्रेस के मूल नाम और चुनाव चिह्न पर अंतिम अधिकार किसका होगा, इसका फैसला अभी बाकी है।
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