भारत की ऐसे टूरिस्ट स्पॉट्स जहां विदेशी नागरिकों की एंट्री है बैन, अलग से लेनी पड़ती है परमिशन
भारत में हर साल बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक अलग-अलग पर्यटन स्थलों को देखने आते हैं। खास तौर पर लोग यहां की विविधताओं से भरी समृद्ध संस्कृति से काफी प्रभावित होते हैं। आमतौर पर किसी भी देश की यात्रा के लिए पासपोर्ट और वीजा सबसे जरूरी दस्तावेज होते हैं, लेकिन इसके बावजूद कुछ स्थान ऐसे भी होते हैं जहां जाने के लिए विशेष अनुमति लेनी पड़ती है।
भारत में भी कई ऐसी जगहें हैं जहां विदेशी पर्यटकों को सीधे प्रवेश की इजाजत नहीं होती। इसके पीछे सुरक्षा से जुड़े और राजनीतिक कारण होते हैं। अधिकतर ये इलाके अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पास स्थित होते हैं या फिर संरक्षित जनजातीय क्षेत्रों में आते हैं।
स्थानीय संस्कृति, प्राकृतिक संसाधनों और वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन स्थानों पर खास तरह के प्रतिबंध लगाए जाते हैं। इसी वजह से भारत में कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां न केवल विदेशी नागरिकों को, बल्कि दूसरे राज्यों से आने वाले भारतीयों को भी प्रवेश के लिए विशेष परमिट की आवश्यकता होती है। आइए जानते हैं ऐसी ही कुछ जगहों के बारे में।
उत्तराखंड का चकराता
उत्तराखंड के खूबसूरत पहाड़ी इलाकों में चकराता एक लोकप्रिय हिल स्टेशन है, जो देहरादून जिले में स्थित है। देवदार के घने जंगल, ऊंची पहाड़ियां और कल-कल बहते झरने इसकी प्राकृतिक सुंदरता को और भी आकर्षक बनाते हैं।
चकराता एक सैन्य छावनी क्षेत्र (कंटोनमेंट एरिया) है। भारतीय नागरिक यहां बिना किसी विशेष अनुमति के घूम सकते हैं, लेकिन उन्हें पहचान के लिए आधार कार्ड या वोटर आईडी साथ रखना जरूरी होता है। वहीं, विदेशी नागरिकों को यहां आने के लिए पहले अनुमति लेनी पड़ती है। यह अनुमति प्रक्रिया आसान नहीं है और परमिशन मिलने के बाद भी विदेशी पर्यटकों को यहां रुकने की इजाजत नहीं दी जाती।
अरुणाचल प्रदेश
भारत का उत्तर-पूर्वी राज्य अरुणाचल प्रदेश विदेशी नागरिकों के लिए प्रतिबंधित क्षेत्रों में शामिल है। यहां जाने के लिए उन्हें PAP यानी प्रोटेक्टेड एरिया परमिट लेना अनिवार्य होता है। इस राज्य को ‘उगते सूरज की धरती’ के नाम से भी जाना जाता है।
भारतीय नागरिकों को भी अरुणाचल प्रदेश की यात्रा के लिए ILP यानी इनर लाइन परमिट की आवश्यकता होती है। इसके लिए सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त टूर ऑपरेटर के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है, जिसमें कुछ जरूरी दस्तावेज जमा करने होते हैं। इसके अलावा, विदेशी नागरिकों को यहां के कुछ इलाकों में प्रवेश की अनुमति नहीं होती।
लद्दाख
बर्फ से ढके ऊंचे पहाड़, गहरी घाटियां, नीली झीलें और प्राचीन बौद्ध मठ लद्दाख को खास पहचान देते हैं। यही वजह है कि यह जगह हर नेचर लवर और ट्रैवल एंथूजियास्ट की बकेट लिस्ट में शामिल रहती है।
लद्दाख की यात्रा के लिए भारतीय नागरिकों को कुछ क्षेत्रों में इनर लाइन परमिट लेना पड़ता है, जबकि विदेशी पर्यटकों के लिए प्रोटेक्टेड एरिया परमिट अनिवार्य होता है।
मिजोरम
सीमावर्ती राज्य होने के कारण मिजोरम में विदेशी नागरिकों के प्रवेश पर विशेष नियम लागू हैं। यहां आने के लिए उन्हें PAP यानी प्रोटेक्टेड एरिया परमिट लेना जरूरी होता है। बिना परमिट के पाए जाने पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
भारतीय नागरिकों को भी मिजोरम में प्रवेश के लिए इनर लाइन परमिट की जरूरत होती है। स्थानीय संस्कृति और परंपराओं की रक्षा, जनसांख्यिकीय संतुलन बनाए रखना, प्राकृतिक संसाधनों और सुरक्षा कारणों से यहां सख्त नियम लागू किए गए हैं।
सिक्किम
सिक्किम की हरी-भरी वादियां, हिमालय के मनमोहक दृश्य और साफ-सुथरी झीलें इसे किसी स्वर्ग से कम नहीं बनातीं। यह जगह प्रकृति प्रेमियों और एडवेंचर पसंद करने वालों दोनों के लिए बेहतरीन मानी जाती है।
सिक्किम में दूसरे राज्यों से आने वाले भारतीय नागरिकों को इनर लाइन परमिट लेना होता है, जबकि विदेशी पर्यटकों के लिए प्रोटेक्टेड एरिया परमिट जरूरी होता है। इसके लिए सरकारी मान्यता प्राप्त ट्रैवल एजेंसियों के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है।

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