किसान मचान तकनीक का करें प्रयोग, होगा डबल मुनाफा...

मध्य प्रदेश के सीधी जिले के किसान अब पारंपरिक खेती से हटकर देसी और कम लागत वाली तकनीकों को अपना रहे हैं। यहां के कई गांवों में किसान बांस के सहारे मचान बनाकर बेलदार सब्जियों की खेती कर रहे हैं। इस तकनीक से करेला, तोरई और लौकी जैसी फसलों का उत्पादन बढ़ रहा है, जिससे कम जमीन में भी अधिक मुनाफा मिल रहा है।
 
मोड़ी गांव में मचान तकनीक का प्रयोग
 
मोड़ी गांव के किसान रामाशंकर कुशवाहा कई वर्षों से मचान विधि से खेती कर रहे हैं। इस समय वे अपने खेत में तोरई की फसल उगा रहे हैं। खेत में लगभग पांच-पांच कदम की दूरी पर नालियां बनाकर उनमें गोबर की खाद डाली जाती है, जिसके बाद बांस और तारों से मचान तैयार किया जाता है ताकि बेल ऊपर चढ़ सके।
 
उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार
 
किसानों का कहना है कि मचान विधि से फसल को पर्याप्त धूप और हवा मिलती है, जिससे फल बड़े और गुणवत्तापूर्ण होते हैं। जमीन से ऊपर होने के कारण फसल में सड़न और रोग कम लगते हैं। इससे उत्पादन भी बढ़ जाता है और किसानों को बेहतर कीमत मिलती है।
 
रोगों से बचाव के देसी उपाय
 
तोरई और अन्य बेलदार फसलों में बैक्टीरिया और फफूंद जनित रोगों का खतरा अधिक रहता है। इससे बचाव के लिए किसान देसी उपाय अपना रहे हैं, जिसमें 5 लीटर खट्टा छाछ, 2 लीटर गोमूत्र और 40 लीटर पानी मिलाकर छिड़काव किया जाता है, जिससे फसल लगभग तीन सप्ताह तक सुरक्षित रहती है।
 
किसानों की बढ़ती आय और भविष्य की उम्मीद
 
करेला और तोरई जैसी फसलों की मांग को देखते हुए व्यापारी सीधे खेतों तक पहुंच रहे हैं। किसान समय पर बुवाई और सिंचाई कर अच्छी पैदावार ले रहे हैं। इस तकनीक से खेती कम लागत में अधिक लाभ देने वाली साबित हो रही है, जिससे किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद है।

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