ट्विशा शर्मा मौत मामला: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा एक्शन, एमपी पुलिस से केस छीनकर CBI को सौंपी जांच
मध्य प्रदेश की 33 साल की मॉडल-एक्टर ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने खुद दखल देते हुए सोमवार को एक बेहद कड़ा और बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मध्य प्रदेश पुलिस के हाथ से केस छीनकर देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी CBI को सौंपने का सख्त आदेश दिया है। इस दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने राज्य की व्यवस्था और रसूखदारों पर कई ऐसे तीखे सवाल उठाए, जिससे कोर्ट रूम का तापमान बढ़ गया। अदालत की सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि "CBI आज ही इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच पूरी तरह अपने हाथ में ले लेगी।" सुप्रीम कोर्ट ने इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए उम्मीद जताई है कि अब बिना किसी दबाव के, पूरी तरह निष्पक्ष और त्वरित जांच सुनिश्चित की जाएगी।
वहीं इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब अदालत के सामने आरोपी पक्ष की गिरिबाला सिंह, ट्विशा की सास, जो एक रिटायर्ड जज हैं, उनके रसूख और जांच में रोक-टोक का कच्चा चिट्ठा खोला गया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि गिरिबाला सिंह अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर रही हैं और अब तक पुलिस पूछताछ के लिए हाजिर नहीं हुई हैं। जिसपर कोर्ट ने इस बात पर गहरा आश्चर्य और सवाल उठाया कि इतनी गंभीर धाराएं होने के बावजूद आरोपी को तुरंत जमानत कैसे मिल गई? जब जांच के लिए गिरिबाला से उनका मोबाइल फोन मांगा गया, तो उन्होंने फोन देने में भी आनाकानी की और मुश्किलें खड़ी कीं। सॉलिसिटर जनरल और ट्विशा के वकील ने बताया कि आरोपी सास खुद पुलिस के सामने नहीं जा रही हैं, लेकिन अलग-अलग टीवी चैनलों पर बैठकर इंटरव्यू दे रही हैं। वे मीडिया में कॉल डिटेल्स दिखाकर दिवंगत ट्विशा शर्मा को बदनाम करने और उनके चरित्र पर कीचड़ उछालने की कोशिश कर रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने इन हरकतों को बेहद गंभीरता से लिया। अदालत ने आरोपी और पीड़ित, दोनों पक्षों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि वे मीडिया में बयानबाजी बंद करें। कोई भी अपनी कहानी टीवी पर न सुनाए, बल्कि जो भी कहना है, सीधे जांच एजेंसी के पास जाकर अपना बयान दर्ज कराए। इसके अलावा, मामले में एक और बड़ा मोड़ आ सकता है। ट्विशा शर्मा के परिवार के वकील ने अदालत को संकेत दिए हैं कि वे इस पूरे मुकदमे की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए इसे मध्य प्रदेश से बाहर किसी अन्य राज्य में ट्रांसफर करने की मांग कर सकते हैं। इस पर सीजेआई ने हरी झंडी देते हुए कहा कि कानूनन इस पर कोई रोक नहीं है, पीड़ित परिवार जब चाहे इसके लिए ट्रांसफर पिटीशन दाखिल कर सकता है।
आपको बता दें कि यह पूरा विवाद 12 मई को शुरू हुआ था, जब भोपाल के पॉश इलाके कटारा हिल्स में स्थित ससुराल की छत पर 33 साल की मशहूर मॉडल और एक्टर ट्विशा शर्मा का शव फंदे से लटका हुआ मिला था। ट्विशा के मायके वालों का सीधा आरोप है कि उनकी बेटी को ससुराल वालों ने प्रताड़ित किया और उसकी मौत के जिम्मेदार वही हैं। वहीं दूसरी तरफ, आरोपी ससुराल पक्ष का कहना है कि ट्विशा डिप्रेशन और नशे की लत से जूझ रही थीं, जिसके कारण उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया।
फिलहाल अब जब केस डायरी सीधे देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी CBI के हाथों में जा चुकी है, तो यह साफ है कि रसूख और प्रभाव की दीवारें अब ढहने वाली हैं। क्या ट्विशा शर्मा को इंसाफ मिलेगा? क्या उनकी मौत के पीछे छिपा खौफनाक सच बाहर आ पाएगा? सुप्रीम कोर्ट की इस हुंकार ने साफ कर दिया है कि अब कोई भी दोषी, चाहे वो कितने भी ऊंचे पद पर क्यों न बैठा हो, कानून के लंबे हाथों से बच नहीं पाएगा। आने वाले दिनों में सीबीआई का यह एक्शन और भी ज्यादा बड़े खुलासे करने वाला होने जा रहा है!


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