विक्रम संवत भारतीय अस्मिता और स्वाभिमान का प्रतीक: प्रभारी मंत्री श्री टेटवाल

उज्जैन :  विक्रम उत्सव 2026 के अंतर्गत जिलास्तरीय ‘कोटि सूर्याेपासना’ कार्यक्रम गुरुवार को रामघाट पर प्रातः 10 बजे से आयोजित किया गया। रामघाट पर जिलास्तरीय कोटि सूर्योपासना पूजन संपन्न हुआ। उल्लेखनीय है कि यह आयोजन प्रदेश के सभी जिलों में एक साथ आयोजित किया गया, जिससे सामूहिक आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक एकता का संदेश प्रसारित हुआ।कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री श्री गौतम टेटवाल, सांसद श्री अनिल फिरोजिया, विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा, महापौर श्री मुकेश टटवाल एवं नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव,कलेक्टर श्री रौशन कुमार सिंह सहित जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।  इस अवसर पर प्रभारी मंत्री श्री टेटवाल ने कहा कि विक्रम संवत मात्र एक कैलेंडर नहीं, बल्कि भारतीय अस्मिता और स्वाभिमान का प्रतीक है। इसकी स्थापना 57 ईसा पूर्व महान सम्राट विक्रमादित्य द्वारा की गई थी, जिन्होंने विदेशी शक्तियों को परास्त कर भारत के गौरव को पुनः स्थापित किया। उनका शासनकाल भारतीय इतिहास का स्वर्णिम युग माना जाता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश, विशेष रूप से उज्जैन (प्राचीन उज्जयिनी), सम्राट विक्रमादित्य की कर्मभूमि रही है और आज भी यह विश्व के प्रमुख आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्रों में गिना जाता है। प्रभारी मंत्री ने आगे कहा कि प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में संस्कृति, विरासत और विकास के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सतत कार्य कर रही है। किसानों, महिलाओं, युवाओं और वंचित वर्ग के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिससे समाज के सभी वर्गों का समग्र विकास सुनिश्चित हो रहा है। उन्होंने कहा कि विक्रम की गाथा केवल इतिहास नहीं, बल्कि प्रेरणा का स्रोत है और उनका नेतृत्व आज भी राष्ट्र निर्माण में मार्गदर्शक बना हुआ है। विक्रम उत्सव 2026 के अंतर्गत गुरुवार प्रातः मां शिप्रा के पावन तट पर ‘कोटि सूर्याेपासना’ कार्यक्रम श्रद्धा, आस्था और वैदिक परंपरा के साथ भव्य रूप से आयोजित किया गया। शिप्रा तट पर प्रारंभ हुए इस अनुष्ठान में भगवान सूर्य की उपासना करते हुए नवसंवत 2083 का विधिवत अभिनंदन किया गया। महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ एवं संस्कृति विभाग, मध्यप्रदेश शासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा, विक्रम संवत 2083 के स्वागत के लिए भगवान सूर्य  को अर्घ्य अर्पित किया गया। मां शिप्रा के पवित्र जल से अर्घ्य देते हुए मां शिप्रा का भी पूजन भी किया गया। शंख ध्वनि के साथ नववर्ष में मंगल और समृद्धि की कामना की गई, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। इस अवसर पर पं. वासुदेव पुरोहित के आचार्यत्व में 108 बटुकों द्वारा ‘आदित्य हृदय स्तोत्र’ का सामूहिक पाठ किया गया, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा। कार्यक्रम में महिलाओं ने पारंपरिक रूप से ‘गुड़ी पूजन’ कर नववर्ष का स्वागत किया। प्रसाद स्वरूप नीम मिश्री एवम  ब्रह्म ध्वज वितरण भी किए गए। वहीं बालिकाओं ने शौर्यपूर्ण सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। बालिकाओं ने नृत्य के माध्यम से नव दुर्गा के स्वरूपों को दर्शाया गया, तत्पश्चात बालिकाओं का पूजन कर उन्हें सम्मानित भी किया गया।

रिपोर्टर :  यशपाल दीक्षित

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.