विश्व क्षय रोग दिवस पर आयोजित हुई जनजागृति रैली
उज्जैन : 24 मार्च, विश्व क्षय रोग दिवस के अवसर पर ज़िले में जनजागृति रैली का आयोजन किया गया। रैली को विधायक श्री अनिल जैन कालूहेडा द्वारा हरी झंडी दिखाकर आरंभ किया गया। रैली कार्यालय जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से आरंभ हुई व शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरी। रैली में मुख्य जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक कुमार पटेल, जिला स्वास्थ्य एवं महामारी नियंत्रण अधिकारी डॉ. सुनीता परमार, आरएमओ जिला चिकित्सालय डॉ. चिन्मय चिचोलिकर, जिला क्षय अधिकारी डॉ. अरुण कुशवाह, जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्री मनीष भद्रावाले, नर्सिंग महाविद्यालय की छात्राएं सहित विभिन्न अधिकारी, कर्मचारी उपस्थित रहे। रैली मे नर्सिंग की छात्राओं द्वारा तख्तियों के माध्यम से क्षयरोग के संबंध मे प्रचार-प्रसार किया गया।
उल्लेखनीय है कि प्रतिवर्ष दिनांक 24 मार्च को विश्व क्षय (टीबी रोग) दिवस मनाया जाता है। रॉबर्ट कोच ने सबसे पहले जान लेवा बीमारी टीबी के बेक्टिरिया का पता लगाया था। 139 साल पहले 1882 में आज ही के दिन टीबी की बीमारी के लिये जिम्मेदार बेक्टिरिया माइक्रोबेक्टेरियम की खोज की एवं रॉबर्ट कोच को 1905 में इसके लिये नोबल पुररूकार से सम्मानित किया गया था। इसके पहले टीबी को असाध्य बीमारी के रूप में जाना था। रॉबर्ट कोच के सम्मान में टीबी के बारे में जागरूकता फैलाने के लिये प्रतिवर्ष 24 मार्च को विश्व क्षय दिवस मनाया जाता है।
जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक कुमार पटेल द्वारा बताया कि दो तिहाई टीबी केसेस सिर्फ आठ देशों (भारत, इण्डोनेशिया, चाईना, फिलिपिंस, पाकिस्तान, नाईजिरिया, दक्षिण अफ्रीका, बांग्लादेश) में पाये जाते हैं। टीबी उपचार योग्य बीमारी है और इसका ईलाज पूर्णतः निःशुल्क है। आमतौर पर पन्द्रह दिन की खासी, पन्द्रह दिन का बुखार, बलगम में खुन आना, छाती में दर्द, वजन कम होना आदि संभावित टीबी के लक्षण होते हैं। सामान्यतः टीबी फेफडों में पाई जाती है परंतु बाल और नाखुन के अलावा शरीर के किसी भी हिस्से अथवा अंग में टीबी की बीमारी हो सकती है। समय पर सही ईलाज नहीं लेने पर यह जानलेवा रोग हो सकता है। एक अनुउपचारित क्षय रोगी एक वर्ष में पन्द्रह स्वस्थ्य लोगों को टीबी से ग्रसित कर सकता है।
रिपोर्टर : यशपाल दीक्षित

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