किसान सतीश शर्मा ने नरवाई प्रबंधन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और कृषि समृद्धि का उत्‍कृष्‍ट उदाहरण प्रस्‍तुत किया

उज्जैन : उज्‍जैन जिले की तहसील घट्टिया के प्रगतिशील किसान श्री सतीश शर्मा, पिता श्री प्रभुलाल शर्मा ने पिछले चार वर्षों से लगातार नरवाई (पराली) प्रबंधन करके पूरे क्षेत्र के लिए एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया है।

श्री सतीश शर्मा स्वयं की भूमि को सुरक्षित रखते हुए पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता रखते हैं। उन्होंने बताया “मेरा मुख्य उद्देश्य अपनी जमीन को स्वस्थ बनाए रखना और वातावरण को प्रदूषण से बचाना है। नरवाई जलाने से न सिर्फ पर्यावरण प्रदूषित होता है बल्कि भूमि में मौजूद उपयोगी कीड़े, फफूंद और जीवाणु भी नष्ट हो जाते हैं, जो फसलों की उत्पादकता के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।”

पिछले चार वर्षों के निरंतर प्रयासों का सकारात्मक परिणाम अब साफ दिखाई दे रहा है। श्री शर्मा की भूमि में लाभदायक सूक्ष्म जीवों (कीट, फफूंद एवं जीवाणु) की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसके साथ ही उनकी फसलों का उत्पादन बढ़ा है और खेती की लागत में भी काफी कमी आई है।

वर्तमान में श्री सतीश शर्मा पाटा (Patta) के माध्यम से नरवाई प्रबंधन कर रहे हैं, जो कम लागत में बड़े क्षेत्रफल की नरवाई को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने का सरल और व्यावहारिक तरीका है। उन्होंने कहा “पाटा से नरवाई प्रबंधन बहुत आसान, सस्ता और प्रभावी है। इससे न केवल पराली जलाने की समस्या समाप्त होती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है।”

     श्री सतीश शर्मा सभी किसान भाइयों से अपील करते हुए कहते हैं। “गेहूं की फसल कटाई के बाद नरवाई को आग न लगाएं। नरवाई का उचित प्रबंधन करें। इससे हमारी मिट्टी स्वस्थ रहेगी, पर्यावरण शुद्ध रहेगा और हमारी आय भी बढ़ेगी।”

रिपोर्टर : यशपाल दीक्षित

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