इंगोरिया मंडल विवाद का खुलासा

बड़नगर :  भाजपा इंगोरिया मंडल में चल रहे विवाद की जड़ सामने आ गई है। भाजपा नेता रामप्रसाद पंड्या की मनमानी ही मंडल में गुटबाजी और कार्यकर्ताओं की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह बन रही है। पिछले दो दशक से इनका हस्तक्षेप जारी है। खुलासा तब हुआ जब नाराज कार्यकर्ताओं की खबर प्रमुखता से उठाई जा रही थी। खबर देखने के बाद रामप्रसाद पंड्या ने 8 अप्रैल को हमारे पत्र प्रतिनिधि को फोन लगाया। दो बार कॉल रिसीव नहीं हो पाई, जिसके मिस्ड कॉल सुरक्षित हैं। बातचीत में रामप्रसाद पंड्या ने खुद स्वीकार किया कि इंगोरिया मंडल में दो दशक से उनकी मनमानी चल रही है। ये खुद बोल रहे हैं - "मैंने इसको बनाया, मैंने उसको बनाया"। उन्होंने पार्टी के पदाधिकारी से कहा, "मेरा कहना माना उसने"। रामप्रसाद पंड्या ने बताया: 10 साल पहले राजपूत को मंडल अध्यक्ष मेरे कहने पर बनाया गया। गजेंद्र सिंह को सांसद प्रतिनिधि मेरे कहने पर बनाया, मैं ही उनको सांसद के पास ले गया। इंद्रपाल का नाम भी मेरे द्वारा रखा गया। नए मंडल अध्यक्ष गोपाल आँजना का नाम भी पहली बार मेरे द्वारा दिया गया। असली खेल किसी तीसरे का, रामप्रसाद तो मोहरा हैं। इस तीसरे व्यक्ति ने पूरी एक चेन बना रखी है जो इंगोरिया भाजपा मंडल को चला रही है और जिसने अपना अलग गुट बना रखा है। ये तीसरा व्यक्ति इंगोरिया से बाहर से बैठकर कमान संभालता है। रामप्रसाद जी तो एक मोहरा हैं, पूरा खेल तो किसी तीसरे का ही है। जब कांग्रेस पार्टी सत्ता में आती है तो तीसरा व्यक्ति उनके साथ हो लेता है और भाजपा सत्ता में आती है तो उनके साथ हो जाता है। क्षेत्र की कमान संभालने वाले जनप्रतिनिधि भी यह बात नहीं समझ पाए। कार्यकर्ताओं में चर्चा है कि इन्हें भारत माता के नाम पर मंच तो चाहिए, पर लंबी राजनीति के बाद भी संगठन को जोड़ने वाला भाषण देना नहीं आता। फिर भी विधायक बनने की दावेदारी कर चुके हैं। पिछली बार टिकट नहीं मिला। दोहरा रवैया: मंडल में 'मैंने बनाया', खुद की बारी में पार्टी की आलोचना। पिछली बार जब पार्टी ने दूसरे उम्मीदवार को टिकट दिया तो हमारे पत्र प्रतिनिधि के सामने रामप्रसाद की प्रतिक्रिया थी - "इन्हें ही बार-बार मौका दिया जाता है, हमें नहीं दिया जाता।" मंडल की बात आती है तो खुद कहते हैं कि मैंने बनाया और यह हुआ, लेकिन अपनी बात आती है तो पार्टी की आलोचना करने लगते हैं। रामप्रसाद पंड्या मोर्चे और प्रकोष्ठ को लेकर भी कहते हैं कि 'हमारे द्वारा बनाए गए' हैं। स्थानीय कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इन्होंने दो-तीन लोगों की टीम बना रखी है जो नेतृत्व को भी गुमराह करती है। ब्राह्मण वर्ग के समर्पित कार्यकर्ता भी नाराज हैं। मंडल अध्यक्ष से दो बार जिला पंचायत सदस्य रहे रामप्रसाद पंड्या का पद से मोह भंग नहीं होता। दो दशक से यह देखने में आया है कि जो भी पावर में आता है, ये उसके साथ हो लेते हैं। जहां पावर खत्म, वहाँ साथ खत्म। अब सवाल है कि संगठन व्यक्ति विशेष को महत्व देता है या समर्पित कार्यकर्ताओं को। प्रशिक्षण वर्ग में इंगोरिया और खरसोद खुर्द मंडल की खाली कुर्सियां इसी मनमानी का नतीजा हैं।

रिपोर्टर : विजय सोलंकी 

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