कभी देखा है ढ़ाई रूपये का नोट? यहां होती है पुराने सिक्कों की खरीद-फरोख्त, बन सकते हैं लखपति!
क्या आपने कभी 2.5 रुपये का नोट देखा है? यह भारत की मुद्रा के इतिहास में एक बेहद ही दुर्लभ और अनोखा नोट माना जाता है। झारखंड के हजारीबाग जिले में स्थित जैन कॉइन गैलरी ऐसी जगह है जहां यह नोट ‘मनहूस’ नहीं बल्कि असली खजाने की तरह साबित हो रहा है।
इस गैलरी के मालिक पुराने सिक्कों और नोटों के बड़े शौकीन हैं। वे इन्हें सिर्फ इकट्ठा ही नहीं करते, बल्कि संग्रहकर्ताओं को बेचकर लाखों रुपये कमाते हैं। अगर आप भी पुराने नोटों और सिक्कों में रुचि रखते हैं या आपके पास कोई पुरानी मुद्रा पड़ी है, तो यह गैलरी आपके लिए संपत्ति की खान साबित हो सकती है।
देखा है ढ़ाई का नोट?
आपमें से बहुत लोगों को शायद यह नहीं पता होगा कि भारत में कभी ढ़ाई रुपये का नोट भी चलन में था। यह नोट ब्रिटिश काल का है। 1920 के दशक में, जब भारत में ‘आना’ प्रणाली (16 आने = 1 रुपया) प्रचलित थी, तब 2.5 रुपये यानी 40 आने का नोट जारी किया गया था। यह नोट केवल थोड़े समय के लिए प्रयोग में रहा और 1926 में इसे वापस ले लिया गया। इसी कारण आज यह नोट बेहद दुर्लभ माना जाता है। नीलामी में ऐसे नोट 6 लाख 40 हजार रुपये तक बिक चुके हैं।
यह नोट सिर्फ कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि ब्रिटिश भारत के आर्थिक इतिहास की एक महत्वपूर्ण याद दिलाता है। झारखंड के हजारीबाग में स्थित जैन कॉइन गैलरी में मुगल काल के सिक्के, ब्रिटिश इंडिया के नोट, प्राचीन भारतीय सिक्के और स्वतंत्र भारत के कमेमोरेटिव सिक्के भी मौजूद हैं। गैलरी के मालिक के अनुसार हर सिक्का या नोट इतिहास का एक हिस्सा है। यहां आपको प्राचीन तांबे, चांदी और सोने के सिक्कों से लेकर 1947 के बाद के नोट तक सभी प्रकार की मुद्रा मिल सकती है।
लगती है शौकीनों की भीड़
इस गैलरी में संग्रहकर्ता दूर-दूर से आते हैं क्योंकि यहां मिलने वाली मुद्रा ऑनलाइन मार्केट की तुलना में सस्ती और असली होती है। भारत में न्यूमिस्मेटिक्स यानी सिक्का और नोट संग्रह का शौक तेजी से बढ़ रहा है। लोग पुराने सिक्के और नोट बेचकर लाखों रुपये कमा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, एक पुराने 1 रुपये के नोट की कीमत 7 लाख तक पहुंच सकती है, जबकि फैंसी नंबर वाले नोट करोड़ों में बिक जाते हैं।
हजारीबाग की यह गैलरी ऐसे शौकीनों के लिए मिलन स्थल बन गई है। यहां खरीद-फरोख्त होती है और गैलरी के मालिक इतिहास को संरक्षित करने में लगे हैं। संग्रहकर्ता बताते हैं कि गैलरी देखकर दिल खुश हो जाता है, क्योंकि यहां प्राचीन मुगल सम्राटों के सिक्के से लेकर जॉर्ज पंचम के चित्र वाले नोट तक सब कुछ संगठित तरीके से प्रदर्शित है। मालिक का कहना है, “हर पुराना सिक्का केवल धातु का टुकड़ा नहीं है, बल्कि इतिहास का हिस्सा है। हम इसे सहेजते हैं ताकि आने वाली पीढ़ियां जान सकें कि हमारी मुद्रा कैसे विकसित हुई।”

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