मासूम आस्था का अद्भुत रूप: 7 साल की बच्ची के निष्छल प्रेम के आगे झुका प्रशासन, 'लड्डू गोपाल' बने स्कूल के नियमित छात्र

मध्य प्रदेश के सतना जिले से भक्ति, वात्सल्य और अनोखी जिद की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने इंसान और ईश्वर के रिश्ते की परिभाषा को नए सिरे से गढ़ा है। आमतौर पर मंदिरों और पूजा-घरों तक सीमित रहने वाले भगवान अब एक प्राइवेट स्कूल की क्लासरूम में बैठकर पढ़ाई करते नजर आ रहे हैं। यह सब मुमकिन हुआ है सात साल की बच्ची आयुषी पांडे के अटूट कान्हा-प्रेम और उसकी निश्छल बाल-हठ के कारण।

'लल्ला' के बिना स्कूल जाने से किया इंकार

सतना के धवारी क्षेत्र की रहने वाली आयुषी पांडे के लिए भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप 'लड्डू गोपाल' महज पूजा की कोई मूर्ति या प्रतिमा नहीं हैं। वह उन्हें अपना सगा भाई, दोस्त और परिवार का सबसे लाडला सदस्य 'लल्ला' मानती है। आयुषी की दिनचर्या अपने कान्हा के इर्द-गिर्द ही घूमती है सुबह उन्हें जगाने से लेकर भोजन कराना, उनके साथ खेलना और रात को सुलाना, सब आयुषी खुद करती है।

लेकिन जब आयुषी का स्कूल में दाखिला हुआ, तो समस्या खड़ी हो गई। सुबह स्कूल जाते वक्त जब लड्डू गोपाल घर पर अकेले रह जाते, तो आयुषी का मन पढ़ाई में नहीं लगता था। अपने लल्ला से बिछड़ने का दुख जब सहा नहीं गया, तो मासूम ने अपने पिता नरेंद्र पांडे और माता रेखा पांडे के सामने साफ शर्त रख दी "अगर लल्ला स्कूल नहीं जाएंगे, तो मैं भी पढ़ाई करने नहीं जाऊंगी।"

जन्माष्टमी की पूर्व संध्या पर मिला दाखिला

बेटी की इस अगाध श्रद्धा और हठ को देखकर माता-पिता ने स्कूल प्रबंधन से संपर्क किया। शुरुआत में तो स्कूल प्रशासन के लिए यह बात थोड़ी अजीब थी, लेकिन जब उन्होंने बच्ची के भाव और कान्हा के प्रति उसका निश्छल प्रेम देखा, तो वे मना नहीं कर सके। जन्माष्टमी से ठीक एक दिन पहले, 4 सितंबर को स्कूल में लड्डू गोपाल का औपचारिक रूप से केजी-1 (KG-1) कक्षा में एडमिशन दर्ज किया गया।

बस्ता, टिफिन और वॉटर बॉटल पूरे इंतज़ाम के साथ जाते हैं कान्हा

अब लड्डू गोपाल सिर्फ नाम के छात्र नहीं हैं, बल्कि रोजाना एक नियमित विद्यार्थी की तरह स्कूल की पोशाक और पूरी तैयारी के साथ क्लास जाते हैं। आयुषी हर सुबह अपने लल्ला को तैयार करती है। उनके लिए एक छोटा स्कूल बैग, टिफिन बॉक्स और पानी की बोतल अलग से रखी जाती है। क्लासरूम में भी उनके बैठने की विशेष व्यवस्था की गई है।

मासूम बच्ची और उसके 'लल्ला' के इस अनूठे रिश्ते की चर्चा अब न केवल पूरे मध्य प्रदेश में हो रही है, बल्कि यह कहानी लोगों को यह संदेश भी दे रही है कि जब भक्ति में निश्छलता और सच्चा प्रेम हो, तो ईश्वर भी भक्त के रंग में रंग जाते हैं।

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