यूपी पुलिस की कमान अब राजीव कृष्ण के हाथों में, बने स्थायी डीजीपी

उत्तर प्रदेश को आखिरकार अपना स्थायी पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मिल गया है। राज्य सरकार ने मौजूदा कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्ण को पूर्णकालिक डीजीपी नियुक्त करने का फैसला किया है। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा भेजे गए नामों पर विचार-विमर्श के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके नाम को मंजूरी दी। नियुक्ति का आदेश जारी होते ही प्रदेश में करीब चार वर्षों से चला आ रहा स्थायी डीजीपी का इंतजार खत्म हो गया।

यूपीएससी ने हाल ही में हुई बैठक के बाद तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम राज्य सरकार को भेजे थे। इनमें 1990 बैच की रेणुका मिश्रा और 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी पीयूष आनंद तथा राजीव कृष्ण शामिल थे। शुरुआत से ही राजीव कृष्ण को इस पद के लिए सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा था।

राजीव कृष्ण बीते एक वर्ष से कार्यवाहक डीजीपी के रूप में प्रदेश पुलिस का नेतृत्व कर रहे थे। 1991 बैच के इस वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के पास प्रशासनिक और फील्ड स्तर पर काम करने का लंबा अनुभव है। उन्होंने प्रदेश के कई अहम जिलों और पुलिस इकाइयों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन और यूपीएससी की प्रक्रिया के तहत किसी भी स्थायी डीजीपी का न्यूनतम कार्यकाल दो वर्ष का होता है। ऐसे में राजीव कृष्ण के वर्ष 2028 तक इस पद पर बने रहने की संभावना है। गौरतलब है कि 2022 में तत्कालीन डीजीपी मुकुल गोयल के पद से हटने के बाद से यह पद स्थायी नियुक्ति का इंतजार कर रहा था।

तीन दशक से अधिक के अपने सेवा काल में राजीव कृष्ण ने एक सक्षम और परिणाम देने वाले अधिकारी के रूप में पहचान बनाई है। कार्यवाहक डीजीपी बनने से पहले वह डीजी इंटेलिजेंस और पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के अध्यक्ष जैसे अहम पदों का दायित्व संभाल रहे थे। शासन और प्रशासनिक हलकों में उनकी छवि एक भरोसेमंद अधिकारी की मानी जाती है।

राजीव कृष्ण लखनऊ, आगरा, मथुरा, इटावा और नोएडा जैसे महत्वपूर्ण जिलों में पुलिस कप्तान रह चुके हैं। इटावा में तैनाती के दौरान उन्होंने दस्यु गिरोहों के खिलाफ प्रभावी अभियान चलाकर उल्लेखनीय सफलता हासिल की थी।

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