आरक्षण पर सियासत तेज! अखिलेश के बाद खरगे-राहुल ने बढ़ाई BJP की टेंशन

उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 के चुनाव की आहट के साथ आरक्षण की एंट्री हो चुकी है...और एंट्री भी ऐसी कि सत्ता के गलियारों से लेकर गांव की चौपाल तक राजनीतिक तापमान बढ़ने लगा है। जी हां एक तरफ आरक्षण हटाओ आंदोलन से जुड़े हर्ष दुबे से यूपी के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक की मुलाकात...दूसरी तरफ इस मुलाकात के बाद समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव का बीजेपी सरकार पर सीधा हमला...और अब मामला सिर्फ आरक्षण तक नहीं रुका है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर OBC जातियों की सही तरीके से गणना कराने की मांग उठाई है। यानी 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सियासत की पिच तैयार हो रही है...और इस पिच पर सबसे बड़ा सवाल है कि "जिसकी जितनी संख्या, उसकी उतनी भागीदारी"... क्या यही नारा 2027 के चुनाव का सबसे बड़ा चुनावी हथियार बनने जा रहा है? क्योंकि पिछले लोकसभा चुनाव में विपक्ष ने संविधान बचाने और आरक्षण को लेकर बीजेपी के खिलाफ जो नैरेटिव बनाया था, उसका असर उत्तर प्रदेश में साफ दिखाई दिया। आज यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से सपा और कांग्रेस के पास कुल 43 सीटें हैं। यानी विपक्ष के पास एक ऐसा चुनावी फॉर्मूला है, जिसे वह पहले आजमा चुका है और उसका फायदा भी देख चुका है। आइए, देखते हैं यूपी की सियासत में छिड़े इस जातीय चक्रव्यूह की पूरी इनसाइड रिपोर्ट!

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 अभी दूर है...लेकिन राजनीतिक पार्टियों ने अपना चुनावी होमवर्क शुरू कर दिया है। और इस होमवर्क में इस वक्त सबसे ज्यादा चर्चा जिस मुद्दे की है...वो है आरक्षण और जातीय समीकरण। लेकिन आपको बता दें यूपी की राजनीति में जाति कोई नया मुद्दा नहीं है। यहां चुनाव लंबे समय से जातीय समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमते रहे हैं। लेकिन इस बार कहानी थोड़ी अलग दिखाई दे रही है। क्योंकि आरक्षण का मुद्दा अब सीधे राजनीतिक दलों के नैरेटिव में शामिल होता नजर आ रहा है। वहीं इसकी ताजा तस्वीर तब सामने आई जब उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने आरक्षण हटाओ आंदोलन से जुड़े हर्ष दुबे से मुलाकात की और उनकी बात केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाने की बात कही। बस फिर क्या था...समाजवादी पार्टी को बीजेपी पर हमला करने का मौका मिल गया। अखिलेश यादव ने आरक्षण को लेकर बीजेपी सरकार पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए। और यहीं से 2027 के चुनाव की एक नई राजनीतिक पिच तैयार होती दिखाई देने लगी। अब आप सोच रहे होंगे कि आरक्षण का मुद्दा इतना बड़ा क्यों है? तो आपको बता दें उत्तर प्रदेश में करीब 80 लोकसभा सीटें हैं। देश की सबसे ज्यादा लोकसभा सीटों वाला राज्य होने की वजह से यूपी की चुनावी राजनीति का असर दिल्ली तक दिखाई देता है।

वहीं पिछले लोकसभा चुनाव की बात करें तो, विपक्ष ने संविधान और आरक्षण को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया। बीजेपी के खिलाफ विपक्ष का सबसे बड़ा नैरेटिव यही रहा कि अगर बीजेपी को बड़ी ताकत मिली तो संविधान और आरक्षण खतरे में पड़ सकता है। इस नैरेटिव का उत्तर प्रदेश में खासा असर देखने को मिला। सपा और कांग्रेस ने मिलकर अच्छा प्रदर्शन किया। वहीं अब 2027 विधानसभा चुनाव से पहले विपक्ष के सामने सवाल है कि क्या उसी नैरेटिव को फिर से जमीन पर उतारा जा सकता है? तो आपको बता दें समाजवादी पार्टी के लिए जवाब शायद हां है। क्योंकि अखिलेश यादव लगातार PDA की राजनीति को आगे बढ़ा रहे हैं।

P यानी पिछड़ा
D यानी दलित
A यानी अल्पसंख्यक

अखिलेश की कोशिश है कि इन वर्गों को एक राजनीतिक छतरी के नीचे लाकर बीजेपी के खिलाफ मजबूत सामाजिक समीकरण तैयार किया जाए। लेकिन विधानसभा चुनाव लोकसभा से अलग होता है। वहीं इसी बीच कांग्रेस ने भी OBC जनगणना के मुद्दे को और तेज कर दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर जनगणना में OBC जातियों की सही गणना को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस की दलील है कि सिर्फ OBC लिख देने से जातियों की वास्तविक तस्वीर सामने नहीं आएगी। ऐसे में कांग्रेस की मांग है कि OBC की गणना के लिए भी ऐसी व्यवस्था हो, जिससे जातियों की वास्तविक संख्या सही तरीके से सामने आ सके।

कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश में 2027 की चुनावी बिसात बिछ चुकी है। अभी चुनाव की तारीख नहीं आई...लेकिन राजनीतिक पार्टियां मैदान में उतर चुकी हैं। कहीं आरक्षण की चर्चा है...कहीं जातीय जनगणना की मांग...तो कहीं PDA के जरिए पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वोटों को एक साथ लाने की कोशिश। अब देखना ये है कि 2027 में यूपी की जनता की प्राथमिकता क्या होगी? क्या जातीय जनगणना और आरक्षण चुनाव की दिशा तय करेंगे? क्या PDA बीजेपी के सामाजिक समीकरण की काट बन पाएगा? फिलहाल असली मुकाबला चुनाव के दिन होगा...लेकिन 2027 की लड़ाई की पटकथा लिखने का काम अभी से शुरू हो चुका है। 

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