अखिलेश यादव के सामने Push-Ups लगाने वाले किसान की असली कहानी

इन दिनों इंटरनेट की दुनिया में, फेसबुक से लेकर ट्विटर और इंस्टाग्राम की रील्स पर एक वीडियो आग की तरह फैल रहा है! वीडियो ऐसा कि देखने वालों की आंखें फटी की फटी रह जाएं। उस वीडियो को क्या आपने देखा? जिसमें यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के सामने...एक 50 साल का अधेड़ शख्स अपनी घड़ी और मोबाइल टेबल पर रखता है, फर्श पर बैठता है और दनादन दंड-बैठक लगाना शुरू कर देता है! खुद अखिलेश यादव मुस्कुराते हुए उसकी गिनती कर रहे हैं और फिर प्यार से आगे बढ़कर उसका हाथ पकड़कर उसे रोकते हैं। इस वीडियो को देखकर कोई इसे अंधभक्ति और टिकट पाने का जुगाड़ कह रहा है, तो कोई इसे नेता और कार्यकर्ता के बीच के अनमोल प्यार की मिसाल बता रहा है! विरोधी तंज कस रहे हैं, तो समर्थक तालियां बजा रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अखिलेश यादव के सामने अपनी फौलादी फिटनेस का दम दिखाने वाला यह बाहुबली शख्स आखिर है कौन? इस वायरल वीडियो के पीछे की असली, अनसुनी और बेहद दिलचस्प कहानी क्या है? तो आइए जानते हैं इस वायरल वीडियो के पीछे का सच....

दरअसल, चर्चाओं के बाजार में आग लगाने वाले इस शख्स का नाम है सीताराम यादव, जिन्हें इनके इलाके में लोग प्यार से कन्हैयालाल के नाम से जानते हैं। कन्हैयालाल बुंदेलखंड की वीर भूमि यानी उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के रहने वाले हैं। वह कोई आम इंसान नहीं, बल्कि अपने इलाके के एक बड़े, प्रतिष्ठित किसान और समाजवादी पार्टी के एक बेहद ऊर्जावान और समर्पित कार्यकर्ता हैं। कन्हैयालाल करीब तीन साल पहले यानी साल 2023 में अपनी मां से प्रेरणा लेकर सक्रिय राजनीति में आए थे। खेती-किसानी करने वाले कन्हैयालाल पर स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव यानी नेताजी के विचारों और उनकी सादगी का ऐसा जादू चला कि उन्होंने समाजवादी विचारधारा को पूरी तरह अपने दिल में बसा लिया। 50 साल की उम्र में भी कन्हैयालाल की फिटनेस ऐसी है कि अच्छे-अच्छे नौजवान पानी मांग जाएं! इसका राज यह है कि वे बचपन से ही पहलवानी के शौकीन रहे हैं और आज भी रोजाना अपने घर पर नियम से एक से दो घंटे जी-तोड़ कसरत करते हैं। अब आते हैं उस सबसे बड़े भ्रम पर जो सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है। लोग कह रहे हैं कि यह वीडियो अभी का है, लेकिन सच यह नहीं है! खुद सीताराम यादव उर्फ कन्हैयालाल ने इस राज से पर्दा उठाया है। 

यह वायरल वीडियो दरअसल 1 जनवरी 2026 का है, यानी कहानी कई महीने पुरानी है! कन्हैयालाल जनवरी में लखनऊ स्थित सपा दफ्तर पहुंचे थे। वह वहां अपनी बेटी की शादी का कार्ड देने और अखिलेश यादव को न्योता देने गए थे। लेकिन कन्हैयालाल खाली हाथ नहीं गए थे, वह अपने साथ अलीगढ़ के कारीगरों से विशेष रूप से तैयार करवाई गई करीब ढाई फीट ऊंची और लगभग 38 किलोग्राम वजनी पीतल की एक बेहद खूबसूरत प्रतिमा लेकर गए थे। यह प्रतिमा किसी और की नहीं, बल्कि सपा संरक्षक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव की थी। जब कन्हैयालाल ने वह भारी-भरकम मूर्ति अखिलेश यादव को भेंट की, तो वे भावुक हो गए। उन्होंने अखिलेश से कहा...नेताजी सच्चे मायनों में धरतीपुत्र थे और खुद एक बड़े पहलवान भी रहे हैं। अगर आज नेताजी जीवित होते, तो मैं उन्हें दंडवत प्रणाम करता। क्योंकि वे पहलवान थे, इसलिए मैं उनके सम्मान में पुश-अप लगाकर उन्हें प्रणाम करना चाहता हूं।

यह सुनते ही अखिलेश यादव मुस्कुराए और बोले, "अरे! क्या आप भी पहलवानी करते हैं? फिर तो आप पुश-अप्स भी लगाते होंगे, जरा लगाकर दिखाइए!" बस फिर क्या था! नेताजी की प्रतिमा को प्रणाम कर किसान का बेटा कन्हैयालाल तुरंत वहीं फर्श पर बैठ गया और फटाफट पुश-अप्स लगाने लगा। उन्होंने देखते ही देखते दनादन पुश-अप्स मारने शुरू कर दिए। अलग-अलग दावों के मुताबिक, जैसे ही उन्होंने 5 से 9 पुश-अप्स लगाए और वो अगली बार झुकने लगे, अखिलेश यादव उनकी इस जिंदादिली को देख गदगद हो गए। अखिलेश ने खुद आगे बढ़कर बड़े प्यार से उनका दोनों हाथ पकड़कर उन्हें उठाया, उनकी पीठ थपथपाई और हंसते हुए कहा, "बस-बस रहने दो, बहुत हो गया, नहीं तो कल हाथ-पैर दुखेंगे!" वहीं जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर दोबारा वायरल हुआ, राजनीति के गलियारों में घमासान मच गया। विपक्ष ने इसे राजनीतिक गुलामी और टिकट पाने की अंधभक्ति का नाम देकर अखिलेश यादव को घेरना शुरू कर दिया। लेकिन इस दावे पर समाजवादी पार्टी के समर्थकों और प्रत्यक्षदर्शियों ने पलटवार किया और विरोधियों को करारा जवाब दिया। समर्थकों का कहना है कि यह कोई राजनीतिक गुलामी नहीं बल्कि एक सीधे-साधे किसान का अपने प्रिय नेता और अखाड़े से जुड़े नेताजी के प्रति आदर भाव था। 

आपको बता दें अखिलेश यादव और कन्हैयालाल का यह रिश्ता सिर्फ पुश-अप्स तक सीमित नहीं रहा। अखिलेश यादव को कन्हैयालाल का यह सरल और अनूठा अंदाज इतना भाया कि उन्होंने झांसी आने का अपना वादा निभाया और 21 फरवरी 2026 को वह खुद झांसी में कन्हैयालाल की बेटी के विवाह समारोह में शामिल होने पहुंचे, जिससे इस परिवार की खुशियां दोगुनी हो गईं। इसके बाद, अभी हाल ही में 1 जुलाई 2026 को जब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का जन्मदिन था, तो लखनऊ के सपा दफ्तर में हजारों समर्थकों का समंदर उमड़ा हुआ था। कन्हैयालाल एक बार फिर झांसी से लखनऊ पहुंचे थे। इस बार भी वह खाली हाथ नहीं थे, बल्कि एक और बड़ा सरप्राइज लेकर आए थे! इस बार वे अपने साथ लगभग तीन फीट ऊंची और करीब 58 किलोग्राम वजनी पीतल की एक अनोखी और भारी-भरकम प्रतिमा लेकर आए थे, जिसमें अखिलेश यादव को उनकी पार्टी के सिंबल यानी साइकिल पर सवार दिखाया गया है। इसी मुलाकात के बाद कन्हैयालाल का वह पुराना पुश-अप वाला वीडियो इंटरनेट पर फिर से ट्रेंड करने लगा।

तो देखा आपनो, यह है उस वायरल वीडियो के पीछे का पूरा सच! झांसी के जिलाध्यक्ष बृजेंद्र सिंह भोजला ने बिल्कुल सही कहा है कि सीताराम यादव उर्फ कन्हैयालाल जैसे निष्ठावान, वफादार और ऊर्जावान कार्यकर्ता ही असल मायने में किसी भी पार्टी की असली रीढ़ और ताकत होते हैं, जो बिना किसी लालच के अपने नेता पर जान छिड़कते हैं। जो विरोधी इसे टिकट का खेल बता रहे थे, उन्हें समझ लेना चाहिए कि हर चीज राजनीति के चश्मे से नहीं देखी जाती; कुछ रिश्ते दिल के और सम्मान के होते हैं। कन्हैयालाल का यह फिटनेस वीडियो और अपने नेता के प्रति उनका यह अनोखा समर्पण आज सोशल मीडिया पर लोगों का दिल जीत रहा है। 

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