यूपी में स्मार्ट मीटर लगाने पर तत्काल रोक! जनता के गुस्से के आगे झुका पावर कॉर्पोरेशन!
उत्तर प्रदेश की बिजली और उपभोक्ताओं के बीच चल रही टेंशन अब एक बड़े मोड़ पर आ खड़ी हुई है. जी हां स्मार्ट मीटर को लेकर प्रदेश भर में मच रहे बवाल और सड़कों पर उतरते आक्रोश के बीच योगी सरकार के पावर कॉर्पोरेशन ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने करोड़ों उपभोक्ताओं को फिलहाल बड़ी राहत दे दी है. क्या है यह पूरा मामला और क्यों थमी है स्मार्ट मीटर की रफ़्तार? आइए जानते हैं इस खास रिपोर्ट में...
उत्तर प्रदेश में पुराने बिजली मीटरों को उखाड़कर नए स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने की मुहिम पर UPPCL (उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड) ने तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल ने प्रदेश की सभी डिस्कॉम कंपनियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि जब तक तकनीकी कमेटी अपनी जांच पूरी नहीं कर लेती, तब तक पुराने मीटरों को हाथ भी न लगाया जाए. दरअसल, पिछले कुछ हफ्तों से यूपी के अलग-अलग जिलों से विरोध की तस्वीरें सामने आ रही थीं. उपभोक्ताओं के मुख्य आरोप ये थे कि उनकी मर्जी के खिलाफ जबरन मीटर बदले जा रहे हैं. कई जगहों पर शिकायत मिली कि स्मार्ट मीटर लगते ही बिजली के बिल रॉकेट की तरह ऊपर भाग रहे हैं. प्रीपेड सिस्टम में बैलेंस कटने और अचानक बिजली गुल होने जैसी समस्याओं ने लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया.
आंकड़ों की जुबानी: अब तक क्या हुआ?
भले ही काम रुक गया हो, लेकिन यूपी में स्मार्ट मीटर का जाल काफी फैल चुका है:
कुल स्मार्ट मीटर: करीब 78 लाख
प्रीपेड स्मार्ट मीटर: करीब 70.50 लाख
पुराने मीटर तो नहीं बदलेंगे, लेकिन नए कनेक्शन लेने वालों को अभी भी सिर्फ स्मार्ट प्रीपेड मीटर ही दिए जाएंगे. साफ है कि सरकार ने जनता के गुस्से की नब्ज को पहचान लिया है. 12 अप्रैल को गठित तकनीकी कमेटी अब इस पूरे स्मार्ट खेल की बारीकियों और शिकायतों की जांच करेगी. जब तक कमेटी की रिपोर्ट नहीं आती, तब तक आपके घर का पुराना मीटर सुरक्षित है. लेकिन सवाल अब भी वही है कि क्या तकनीकी जांच के बाद स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं का भरोसा जीत पाएंगे?

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