UP के नए विधान भवन का मॉडल फाइनल, लखनऊ के सहारा शहर में 245 एकड़ में बनेगा भव्य परिसर
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बनने वाले नए विधान भवन की रूपरेखा अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। गोमतीनगर स्थित सहारा शहर की करीब 245 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित इस महत्वाकांक्षी परियोजना को प्रदेश के सबसे बड़े प्रशासनिक और विधायी परिसरों में शामिल किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सुविधाओं से लैस एक विश्वस्तरीय विधान परिसर तैयार करना है।
कमल से प्रेरित होगी भवन की वास्तुकला
प्रस्तावित भवन की सबसे बड़ी विशेषता इसका डिजाइन है। पूरी संरचना कमल के फूल की अवधारणा पर आधारित होगी। ऊपर से देखने पर मुख्य विधानसभा भवन कमल की पंखुड़ियों जैसा दिखाई देगा। इस डिजाइन में भारतीय सांस्कृतिक पहचान को आधुनिक आर्किटेक्चर और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ जोड़ने की कोशिश की गई है।
हजारों करोड़ की लागत वाला मेगा प्रोजेक्ट
करीब ₹5,200 करोड़ की अनुमानित लागत वाले इस प्रोजेक्ट के लिए देश की कई प्रतिष्ठित कंसल्टेंसी एजेंसियों ने अपने डिजाइन प्रस्तुत किए थे। शुरुआती चरण में अनेक प्रस्तावों की समीक्षा के बाद कुछ चुनिंदा डिजाइन शासन को भेजे गए, जिनमें कमल-आधारित मॉडल को प्राथमिकता मिली है। अब इसी अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है।
विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस होगा परिसर
नया विधान परिसर केवल विधानसभा भवन तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें 700 सदस्यों की क्षमता वाला विधानसभा सदन, 200 सीटों वाली विधान परिषद, लगभग 1,000 लोगों के लिए संयुक्त अधिवेशन हॉल और 5,000 से अधिक वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसके अलावा आधुनिक सचिवालय, मुख्यमंत्री आवास, विधायक आवास, वीवीआईपी प्रशासनिक ब्लॉक और अन्य सरकारी कार्यालय भी इसी परिसर का हिस्सा होंगे।
2027 में निर्माण शुरू होने की संभावना
राज्य सरकार की योजना के अनुसार निर्माण कार्य वर्ष 2027 में शुरू किया जा सकता है। परियोजना को भविष्य में होने वाले परिसीमन और बढ़ने वाली विधानसभा सीटों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जा रहा है, ताकि आने वाले वर्षों में अतिरिक्त विस्तार की जरूरत न पड़े।
पर्यावरण और तकनीक पर रहेगा विशेष फोकस
इस परिसर को ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट के अनुरूप विकसित करने की योजना है। सोलर एनर्जी, वर्षा जल संचयन, ऊर्जा दक्ष भवन, हरित क्षेत्र और डिजिटल प्रशासनिक प्रणाली जैसी सुविधाएं इसमें शामिल होंगी। ई-विधानसभा प्रणाली के जरिए सदन की कार्यवाही को पूरी तरह तकनीक आधारित बनाने की तैयारी भी है।
हर जिले के प्रतिनिधियों के लिए अलग व्यवस्था
नई योजना में उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के जनप्रतिनिधियों के लिए अलग-अलग बैठक और चर्चा क्षेत्र विकसित करने का प्रस्ताव है। इससे किसी जिले से जुड़े विकास कार्यों, योजनाओं और स्थानीय मुद्दों पर संबंधित विधायक एवं अधिकारी एक ही स्थान पर प्रभावी ढंग से विचार-विमर्श कर सकेंगे। इससे निर्णय प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और तेज बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
विधानसभा भवन का आंतरिक स्वरूप
मुख्य विधानसभा सभागार भवन के केंद्र में बनाया जाएगा, जबकि उसके चारों ओर अलग-अलग विंग विकसित किए जाएंगे। इन विंग्स में कार्यालय, पुस्तकालय, रिसर्च सेंटर, डिजिटल कॉन्फ्रेंस हॉल और अन्य प्रशासनिक इकाइयों को स्थान दिया जाएगा। आम नागरिकों के लिए विजिटर गैलरी की सुविधा भी प्रस्तावित है, ताकि लोग विधानसभा की कार्यवाही को निर्धारित व्यवस्था के तहत देख सकें।
बजट में मिला शुरुआती प्रावधान
राज्य सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में इस परियोजना की शुरुआती प्रक्रिया के लिए ₹100 करोड़ का टोकन प्रावधान किया है। इस राशि का उपयोग मास्टर प्लान, डिजाइन चयन और तकनीकी परामर्श से जुड़े कार्यों में किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में यह परिसर उत्तर प्रदेश की नई प्रशासनिक पहचान के रूप में स्थापित हो और आधुनिक शासन व्यवस्था का प्रमुख केंद्र बने।
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