UPI हुआ महंगा? 15 अक्टूबर से बदलेंगे नियम, जानिए किस पर लगेगा MDR चार्ज

क्या आप भी फोनपे, गूगल पे या पेटीएम खोलते ही यह सोचकर कांप जाते हैं कि कहीं चाय या राशन के डिजिटल पेमेंट पर कोई तगड़ा चार्ज तो नहीं कटने वाला? जी हां पिछले कुछ दिनों से देश की सियासत से लेकर सोशल मीडिया तक बस एक ही शोर मचा है कि "अरे भाई, क्या अब UPI चलाना महंगा हो गया है?" विपक्ष कह रहा है कि सरकार ने आम आदमी की जेब पर डाका डालने का रास्ता खोल दिया है, तो वहीं सरकार और बीजेपी का दावा है कि डिजिटल इंडिया और मजबूत होने जा रहा है। तो फिर सच क्या है? क्या वाकई आपकी जेब पर इसका असर पड़ेगा या फिर ये सिर्फ सियासत का एक और बुलबुला है? आइए, आज हम आपके सारे भ्रम दूर करते हैं और इस पूरे नए MDR फ्रेमवर्क का कच्चा-चिट्ठा आपके सामने खोलकर रख देते हैं!

UPI से पेमेंट करने वालों के लिए बड़ी खबर है...अगर आप दुकान पर QR कोड स्कैन करके पेमेंट करते हैं, ऑनलाइन खरीदारी करते हैं या किसी को पैसे भेजने के लिए रोजाना Google Pay, PhonePe, Paytm जैसे ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, तो 15 अक्टूबर 2026 से UPI के नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। जी हां 15 अक्टूबर से 2 हजार रुपये से ज्यादा के चुनिंदा मर्चेंट UPI पेमेंट पर 0.4 फीसदी MDR लगाया जाएगा। और 75 हजार रुपये या उससे ज्यादा के सामान्य मर्चेंट पेमेंट पर यह चार्ज अधिकतम 300 रुपये तक सीमित रहेगा। अब आप सोच रहे होंगे कि ये MDR क्या है, तो आपको बता दें MDR यानी Merchant Discount Rate। सीधी भाषा में समझिए...जब कोई ग्राहक UPI के जरिए किसी व्यापारी को पेमेंट करता है, तो उस डिजिटल पेमेंट को प्रोसेस करने वाले बैंक, पेमेंट सिस्टम और दूसरे नेटवर्क पार्टनर्स के बीच एक लागत होती है। अब नए सिस्टम में कुछ चुनिंदा बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर इसी लागत को MDR के जरिए वसूलने की व्यवस्था की गई है। और सबसे अहम बात...ये चार्ज ग्राहक से सीधे वसूलने के लिए नहीं है। NPCI के नए फ्रेमवर्क के मुताबिक MDR मर्चेंट साइड पर लागू होगा। आम नागरिकों के लिए यूपीआई से लेन-देन पहले की तरह ही 100% मुफ्त रहेगा। ग्राहकों से कोई भी चार्ज या हिडन फीस नहीं वसूली जाएगी। सरकार और बैंकों ने सख्त निर्देश दिए हैं कि दुकानदार इस चार्ज का बोझ आम ग्राहकों पर नहीं डाल सकते। ऐसा करना पूरी तरह से गैर-कानूनी होगा।

वहीं दूसरी तरफ NPCI के नए फ्रेमवर्क में छोटे व्यापारियों को राहत दी गई है। जिन छोटे मर्चेंट्स की QR कोड के जरिए UPI से होने वाली मासिक प्राप्ति ₹ लाख तक है, उन्हें MDR से छूट दी गई है। यानी इस श्रेणी के छोटे दुकानदारों पर 2,000 से ऊपर के पेमेंट का सामान्य 0.4% MDR लागू नहीं होगा। मान लीजिए किसी पात्र बड़े मर्चेंट को 2,000 से ज्यादा का पेमेंट मिलता है। तो सामान्य MDR 0.4% होगा।

2,000 का 0.4% = 8 रुपए 

5,000 का 0.4% = 20 रुपए 

10,000 का 0.4% = 40 रुपए 

50,000 का 0.4% = 200 रुपए 

75,000 का 0.4% = 300 रुपए 

और...1 लाख का पेमेंट हो या 2 लाख का...जहां यह सामान्य MDR लागू है, वहां अधिकतम ₹300 की सीमा रहेगी।

सरकार के नए नियमों के मुताबिक, 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले इस फ्रेमवर्क में:

अगर कोई बड़ा व्यापारी 2,000 रुपये से ज्यादा का पेमेंट प्राप्त करता है, तो उस पर 0.4% या अधिकतम 300 रुपये तक का MDR चार्ज लग सकता है।

डेटा बताता है कि देश के 95% से ज्यादा मर्चेंट ट्रांजैक्शन या तो 2,000 रुपये से कम के होते हैं या छोटे दुकानदारों से जुड़े हैं। 
यानी इस फैसले से केवल 4% बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन ही प्रभावित होंगे।

कुछ चुनिंदा सेक्टरों जैसे टेलीकॉम रिचार्ज, बीमा प्रीमियम, रेलवे टिकट और पेट्रोल-डीजल पर 2,000 रुपये से ज्यादा के भुगतान पर केवल 5 रुपये का फ्लैट चार्ज तय किया गया है। 

वहीं म्यूचुअल फंड और स्टॉक ब्रोकर पेमेंट्स पर मात्र 0.02% का चार्ज लगेगा।

वहीं अब आते है राजनीतिक लड़ाई पर। दरअसल, UPI के MDR को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। राहुल गांधी का आरोप है कि सरकार ने 2,000 से ज्यादा के मर्चेंट UPI पेमेंट पर फीस का रास्ता खोल दिया है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि अगर ग्राहक से सीधे चार्ज नहीं लिया जाएगा तो व्यापारी पर आने वाली लागत आखिर किस तरह संभाली जाएगी। राहुल गांधी ने इसे अमेरिकी पेमेंट कंपनियों के दबाव से भी जोड़ा है और सरकार पर अमेरिकी दबाव के सामने झुकने का आरोप लगाया है। वहीं बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को गलत बताया है। बीजेपी ने कहा है कि ग्राहकों पर MDR नहीं लगाया जाएगा। बीजेपी का कहना है कि छोटे मूल्य के ज्यादातर UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन इस दायरे से बाहर हैं और छोटे विक्रेताओं को 1 लाख मासिक QR प्राप्ति तक छूट दी गई है। यानी एक तरफ विपक्ष कह रहा है कि यह कदम आगे चलकर ग्राहकों पर बोझ डाल सकता है...दूसरी तरफ सरकार और बीजेपी का कहना है कि ग्राहक के लिए UPI फ्री ही रहेगा।

तो कुल मिलाकर बात यह है कि सियासत अपनी जगह है, लेकिन हकीकत यह है कि आम आदमी के लिए यूपीआई का मज़ा और उसकी सुविधा पर कोई आंच नहीं आने वाली है। छोटे दुकानदार से लेकर आम ग्राहक तक, सब पूरी तरह से सुरक्षित हैं।

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