यूपी की राजनीति में बढ़ी चुनावी सरगर्मी
उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनावी माहौल बनता साफ नजर आने लगा है। खरमास खत्म होते ही प्रदेश की सियासत गरमाने लगी है। भारतीय जनता पार्टी धर्म और विकास को केंद्र में रखकर चुनावी रणनीति पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नारा “एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे” विपक्ष पर भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। वहीं, नए साल की शुरुआत के साथ सरकार विकास योजनाओं को धरातल पर उतारकर माहौल अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है।
धर्म के मुद्दे पर विपक्ष की रणनीति
भाजपा के धर्म आधारित नैरेटिव का मुकाबला करने के लिए विपक्ष भी सक्रिय हो गया है। विपक्ष की कोशिश है कि हिंदू वोट बैंक पूरी तरह भाजपा के पक्ष में न जाए। इसी कड़ी में प्रयागराज माघ मेला 2026 के दौरान ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़ा विवाद राजनीतिक मुद्दा बन गया है।
माघ मेला विवाद बना सियासी हथियार
मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर संगम नोज तक पालकी से जाने से रोके जाने के मामले को विपक्ष ने सरकार के खिलाफ हथियार बना लिया है। विपक्षी दल इस मुद्दे को उठाकर योगी सरकार को घेरने में जुटे हैं। वहीं, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सीधा हमला बोलते हुए सनातन समाज को भाजपा से अलग होने की बात कही है।
संत समाज में भी मतभेद
इस पूरे विवाद को लेकर संत समाज भी दो हिस्सों में बंटा नजर आ रहा है। जहां एक वर्ग शंकराचार्य के पक्ष में खड़ा दिख रहा है, वहीं संत समाज का दूसरा वर्ग मुख्यमंत्री योगी को निशाना बनाए जाने से नाराज है। माघ मेला प्रशासन के नोटिस को लेकर उठा विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है।
2027 की राह आसान करने में जुटी बीजेपी
योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा ने 2022 में लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी कर इतिहास रचा था। कानून व्यवस्था, बुलडोजर कार्रवाई और एक्सप्रेसवे स्टेट की छवि ने योगी सरकार को मजबूती दी। 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा की पीडीए राजनीति ने भाजपा को नुकसान जरूर पहुंचाया, लेकिन विधानसभा स्तर पर विपक्ष अब तक कोई ठोस विकल्प पेश नहीं कर सका है।
हिंदू वोट बैंक पर विपक्ष की नजर
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस अब तक ऐसा कोई बड़ा मुद्दा नहीं खड़ा कर पाईं जिससे भाजपा की बढ़त को रोका जा सके। ऐसे में विपक्ष की रणनीति हिंदू वोट बैंक में बंटवारे की दिशा में जाती दिख रही है, जबकि सीएम योगी अपनी मजबूत सियासी जमीन पर आक्रामक अंदाज में आगे बढ़ रहे हैं।
सोनीपत से योगी का सख्त संदेश
सोनीपत में दिए गए बयान में मुख्यमंत्री योगी ने सनातन समाज को बांटने वालों को *“कालनेमि”* करार दिया। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन इसे शंकराचार्य विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। इस बयान के बाद कांग्रेस और सपा शंकराचार्य के अपमान का आरोप लगाने लगीं, जबकि योगी सरकार ने साफ किया कि सनातन को बांटने की कोशिशें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।
लव जिहाद और डेमोग्राफी का मुद्दा फिर गरमाया
सीएम योगी ने लव जिहाद और जनसांख्यिकी परिवर्तन के मुद्दे को भी फिर से केंद्र में ला दिया है। उन्होंने कहा कि बेटियों को लव जिहाद से बचाया जाएगा और इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। साथ ही डेमोग्राफी बदलने की किसी भी साजिश को नाकाम करने की बात दोहराई गई।
विपक्ष के सामने नए सवाल
योगी के आक्रामक रुख के बाद प्रदेश की राजनीति में कई सवाल खड़े हो गए हैं। क्या विपक्ष केवल शंकराचार्य विवाद तक सीमित रहेगा या लव जिहाद और गोरक्षा जैसे मुद्दों पर भी जवाब देगा? साफ है कि 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है और आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति और अधिक तीखी होने वाली है।

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