नसीमुद्दीन सिद्दीकी सपा में शामिल..? मुस्लिम वोट बैंक पर सियासी कयास तेज

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी अब तेज़ हो गई है। फरवरी के प्रेम महीने में राजनीतिक पार्टियों के बीच रिश्तों और बदलाव की खबरें चर्चा में हैं। खासकर नसीमुद्दीन सिद्दीकी की स्थिति पर सबकी नजरें हैं। माना जा रहा है कि कांग्रेस को झटका देने वाले नसीमुद्दीन सिद्दीकी समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ जुड़ सकते हैं। पहले उनका बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में लौटने का कयास था, लेकिन अब यह संभावना कम होती दिख रही है। बसपा छोड़ने से पहले नसीमुद्दीन ने मायावती पर कई आलोचनात्मक बयान दिए थे, जिससे उनके बसपा में लौटने की राह मुश्किल हुई। वहीं, सपा में शामिल होने की चर्चा के बीच पश्चिमी यूपी में मुस्लिम वोटों पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की चुनौती भी बढ़ती दिखाई दे रही है।
 
नसीमुद्दीन सिद्दीकी का राजनीतिक सफर
 
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने बहुजन समाज पार्टी से राजनीति शुरू की थी और मायावती के करीबी माने जाते थे। हाल ही में उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दिया। अब चर्चा है कि वे 15 फरवरी को सपा में शामिल हो सकते हैं, जहां सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव उनकी स्वागत करेंगे। उनके साथ कई पूर्व विधायक भी सपा में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। नसीमुद्दीन वर्ष 2007 से 2012 तक बसपा सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं।
 
सपा के लिए महत्व
 
भले ही नसीमुद्दीन आजम खान जितने प्रभावशाली मुस्लिम चेहरा नहीं हैं, लेकिन बुंदेलखंड और पश्चिमी यूपी में उनका दखल है। आजम खान की जेल और स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए, चुनाव तक उनकी उपलब्धता सपा के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है। ऐसे में नसीमुद्दीन सिद्दीकी के शामिल होने से सपा पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड में मुस्लिम वोट बैंक को अपने पक्ष में जोड़ने का प्रयास करेगी। साथ ही, बसपा के कुछ कैडर वोट पर भी असर पड़ सकता है।
 
एआईएमआईएम की सक्रियता
 
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में अपने प्रदर्शन से एआईएमआईएम ने मुस्लिम वोट बैंक में पकड़ बनाई थी। अब पार्टी यूपी में भी अपने प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश कर रही है। सांसद असदुद्दीन ओवैसी और प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली लगातार बयान देकर भाजपा, सपा और कांग्रेस पर निशाना साध रहे हैं।
 
चुनावी समीकरण पर असर
 
पश्चिमी यूपी के मुस्लिम वोटर्स को लेकर एआईएमआईएम और सपा की चाल महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। स्थानीय चेहरा होने के कारण नसीमुद्दीन सिद्दीकी मुस्लिम वोटरों का भरोसा जीत सकते हैं और सपा के लिए यह लाभदायक होगा। मायावती और कांग्रेस भी इस क्षेत्र में सक्रिय हैं, लेकिन नसीमुद्दीन के सपा में शामिल होने से कांग्रेस को बड़ा झटका लग सकता है। इसका साफ संकेत यह है कि विधानसभा चुनाव में सपा कांग्रेस को सीटों पर कोई रियायत नहीं देगी।

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