उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की कवायद

उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण वोट बैंक पर नजर लगातार बनी हुई है। पिछले कुछ वर्षों में कांग्रेस की कमजोर स्थिति और बसपा के शासनकाल के बाद ब्राह्मण वोट भारतीय जनता पार्टी के पाले में चला गया है। वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में ब्राह्मणों का समर्थन मायावती को मिला था, जिससे बसपा को प्रदेश में पूर्ण बहुमत हासिल हुआ। लेकिन 2014 के लोकसभा चुनावों के बाद से यह वोट बैंक भाजपा के साथ बना हुआ है। ऐसे में विरोधी दल ब्राह्मणों को साधने के लिए लगातार रणनीति बना रहे हैं।
 
विधानसभा में परशुराम जयंती का मुद्दा
 
उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक कमाल अख्तर ने परशुराम जयंती पर राज्य में सार्वजनिक अवकाश की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम को ब्राह्मण समाज के साथ-साथ अन्य समाज भी पूजते हैं। कमाल अख्तर ने बताया कि पहले सपा सरकार के दौरान परशुराम जयंती पर अवकाश घोषित होता था, लेकिन वर्तमान योगी सरकार ने इसे रद्द कर दिया है। इस कारण श्रद्धालु और व्यापारी अपने व्यक्तिगत अवकाश लेकर पूजा करते हैं और व्यापार भी बंद रहता है। इस वर्ष 19 अप्रैल को अक्षय तृतीय पर परशुराम जयंती मनाई जाएगी, इसलिए इसे राजकीय अवकाश घोषित करने की आवश्यकता है।
 
ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की राजनीतिक रणनीति
 
कमाल अख्तर, जो मुस्लिम समुदाय के विधायक हैं, के जरिए ब्राह्मण समाज के धार्मिक मुद्दे को विधानसभा में उठाना राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह संदेश भी गया कि सपा ब्राह्मण वोटरों को साधने की कोशिश में सक्रिय है। पिछले दिनों ‘धूसखोर पंडत’ फिल्म के टाइटल को लेकर योगी सरकार ने संज्ञान लिया और मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया। इस बीच सपा इस वर्ग के समर्थन के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाती नजर आ रही है।

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.