यूपी राज्यसभा चुनाव: बीजेपी ने नए चेहरों पर क्यों खेला बड़ा दांव
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर बीजेपी ने अपने 8 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी है। इस सूची में कई ऐसे नाम सामने आए हैं जिनकी चर्चा दूर-दूर तक नहीं थी, तो वहीं कुछ बड़े दिग्गजों के नाम गायब देखकर हर कोई हैरान है। पार्टी ने इस बार पूरी तरह से नए चेहरों पर भरोसा जताया है।
लोकसभा चुनाव हारने वाले नेताओं को नहीं मिला मौका पार्टी सूत्रों के मुताबिक बीजेपी ने यह साफ नीति बनाई है कि जो नेता हालिया लोकसभा चुनाव हार चुके हैं, उन्हें राज्यसभा का टिकट नहीं दिया जाएगा। यही वजह रही कि अमेठी से चुनाव हारीं स्मृति ईरानी, बस्ती से हारे हरीश द्विवेदी, मोहनलालगंज से हारे कौशल किशोर और मुजफ्फरनगर से हारे संजीव बालियान जैसे बड़े चेहरों को इस बार लिस्ट में जगह नहीं मिल पाई है।
संगठन के नियमों और परंपराओं का असर राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि नए नियुक्त हुए कुछ महासचिवों को राज्यसभा भेजा जा सकता है, लेकिन पार्टी की पुरानी परंपरा इसके उलट रही है। बीजेपी में यह चलन रहा है कि नए महासचिवों को तुरंत संसद नहीं भेजा जाता, बल्कि उन्हें संगठन में लंबा वक्त और अनुभव देने के बाद ही यह मौका मिलता है। इसी वजह से कई वरिष्ठ नेताओं को अभी इंतजार करना पड़ रहा है।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा का समीकरण हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा का राज्यसभा कार्यकाल अगले महीने समाप्त होने जा रहा है। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरदीप पुरी के कामकाज और ईरान संकट के दौरान कच्चे तेल की खरीद जैसे अहम मामलों में उनके प्रदर्शन से संतुष्ट हैं, लेकिन पार्टी उन्हें पहले ही दो बार राज्यसभा भेज चुकी है। इसके अलावा वे नियमों के तहत कार्यकाल पूरा होने के बाद भी अगले छह महीने तक मंत्री बने रह सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, लोध समाज के कद्दावर नेता बीएल वर्मा की जगह योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह को राज्यसभा भेजा जा रहा है।
जातीय संतुलन साधने के लिए महिलाओं पर दांव आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए बीजेपी ने जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की पूरी कोशिश की है। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में पासी और कुर्मी समाज के मतदाता पार्टी से छिटक गए थे। इस नाराजगी को दूर करने के लिए पार्टी ने पासी समाज से पूर्व सांसद प्रियंका रावत और कुर्मी समाज से श्रुति गंगवार को मैदान में उतारा है। महिला चेहरों को आगे करके पार्टी ने एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश की है।

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