आधी रात को ईरान में घुसी अमेरिकी सेना, मौत के चंगुल से निकाला अपना ऑफिसर!
आज रक्षा जगत से एक ऐसी खबर आ रही है जिसने पूरी दुनिया को सन्न कर दिया है। इसे कहते हैं-'नो मैन लेफ्ट बिहाइंड!' अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज ने शनिवार की काली रात में ईरान की सरहद के भीतर घुसकर एक ऐसे मिशन को अंजाम दिया है, जिसे इतिहास के सबसे जोखिम भरे रेस्क्यू ऑपरेशंस में गिना जाएगा। दुश्मन की घेराबंदी, सिर पर मंडराती मौत और हाथ में सिर्फ एक पिस्तौल...कैसे एक अमेरिकी एयरफोर्स ऑफिसर 24 घंटे तक ईरान की सेना को छकाता रहा? और कैसे सैकड़ों कमांडो ने आसमान से आग बरसाते हुए अपने साथी को सुरक्षित बाहर निकाला? आइए देखते हैं इस 'इम्पॉसिबल' मिशन की रोंगटे खड़े कर देने वाली रिपोर्ट!
इस हाई-वोल्टेज ड्रामे की शुरुआत शुक्रवार को हुई, जब ईरान ने अमेरिका के शक्तिशाली F-15E स्ट्राइक ईगल विमान को मार गिराया। विमान के गिरते ही दोनों क्रू मेंबर्स ने इजेक्ट किया। पायलट को तो तुरंत बचा लिया गया, लेकिन असली चुनौती थी वेपन्स ऑफिसर, जो दुश्मन के इलाके में फंस गया था। ईरानी सेना ने उस ऑफिसर को जिंदा या मुर्दा पकड़ने के लिए पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया। स्थानीय लोगों को इनाम का लालच दिया गया, लेकिन किस्मत ऑफिसर के साथ थी। वह इलाका सरकार विरोधी था, जहाँ स्थानीय लोगों ने उसकी मुखबिरी करने के बजाय उसे छिपने में मदद की।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कोई साधारण रेस्क्यू नहीं था। इस मिशन में सकड़ों स्पेशल ऑपरेशंस ट्रूप्स, दर्जनों युद्धक विमान, घातक हेलिकॉप्टर और सीआईए (CIA) की 'अनकन्वेंशनल' इंटेलिजेंस टीमें शामिल थीं। ऑफिसर एक बीकन और सुरक्षित कम्युनिकेशन डिवाइस के जरिए अमेरिकी बेस के संपर्क में था। जैसे ही अमेरिकी कमांडो ऑफिसर की लोकेशन के करीब पहुंचे, ईरान की जमीन गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठी। ईरानी सेना के काफिले ऑफिसर की तरफ बढ़ रहे थे, जिन्हें रोकने के लिए अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने आसमान से बमबारी शुरू कर दी।
ऑपरेशन के आखिरी पलों में सांसें तब थम गईं, जब एक तकनीकी खराबी की वजह से कमांडो और ऑफिसर को ले जा रहे दो ट्रांसपोर्ट विमान ईरान के एक रिमोट बेस पर फंस गए। समय कम था और खतरा बड़ा! अमेरिकी कमांडरों ने पलक झपकते ही बड़ा फैसला लिया: फौरन तीन नए विमान वहां भेजे गए। फंसे हुए दोनों पुराने विमानों को बम से उड़ा दिया गया, ताकि अमेरिकी तकनीक ईरान के हाथ न लग सके। इसके बाद, सभी सैनिकों और घायल ऑफिसर को सुरक्षित बाहर निकालकर सीधे कुवैत ले जाया गया। एक वरिष्ठ अमेरिकी सैन्य अधिकारी ने इसे इतिहास के सबसे चुनौतीपूर्ण ऑपरेशंस में से एक बताया है। यह मिशन सिर्फ एक जान बचाने के बारे में नहीं था, बल्कि यह अमेरिकी सैन्य ताकत का एक ऐसा प्रदर्शन था जिसने ईरान को उसकी ही जमीन पर चुनौती दे डाली।
इस ऑपरेशन ने साफ कर दिया है कि दुनिया के नक्शे पर कोई भी कोना इतना दूर नहीं है जहाँ अमेरिकी सेना अपने अपनों को बचाने न पहुँच सके। इस सफल मिशन ने जहाँ अमेरिकी खेमे में नया जोश भर दिया है, वहीं ईरान के लिए यह एक बड़ा रणनीतिक झटका है। घायल ऑफिसर अब विशेषज्ञों की निगरानी में है और उसकी हालत स्थिर है।


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