योगी कैबिनेट में महा-फेरबदल की तैयारी, कई मंत्रियों की छुट्टी तय
अब बात करते हैं देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश की, जहां सियासी बदलाव की आंधी चलने वाली है। उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपने संगठन और सरकार के ढांचे को पूरी तरह बदलने का मन बना लिया है। जी हां दिल्ली में गुरुवार की आधी रात तक चली बैठकों ने यह साफ कर दिया है कि बीजेपी अब किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ बंद कमरे में घंटों मशक्कत की है। इस बैठक का सीधा एजेंडा है....यूपी में क्लीन स्वीप का नया फॉर्मूला।
दरअसल, बिहार में पहली बार अपना मुख्यमंत्री बनाने के बाद अब बीजेपी का पूरा ध्यान उत्तर प्रदेश पर केंद्रित है। पार्टी नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि 2027 में सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए चेहरे नहीं, बल्कि परिणाम चाहिए। यही वजह है कि एक गोपनीय रिपोर्ट के आधार पर अब उन मंत्रियों की कुर्सी खतरे में है जो जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे, जबकि जमीन पर पसीना बहाने वाले नए लड़ाकों के लिए कैबिनेट के दरवाजे खुल गए हैं। तो चलिए जानते हैं आखिर यूपी की राजनीति के गलियारों में क्या पक रहा है!
आपको बता दें गुरुवार की रात दिल्ली के सियासी गलियारों के लिए बेहद अहम रही। यूपी बीजेपी के नए सारथी यानी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ घंटों मंथन किया। यह बैठक महज शिष्टाचार भेंट नहीं थी, बल्कि इसमें उन नामों की लिस्ट पर मुहर लगी है जो आने वाले दिनों में यूपी की सरकार और संगठन का चेहरा बदल देंगे। खबर है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद मंत्रियों के पिछले चार साल के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड तैयार करवाया है। इस सियासी कुंडली में जिन मंत्रियों का प्रदर्शन फीका रहा है, उनकी कैबिनेट से विदाई तय मानी जा रही है। वहीं, जो नेता मुख्यमंत्री के भरोसेमंद हैं और जमीन पर पकड़ रखते हैं, उनकी लॉटरी लगनी तय है। चर्चा तो यह भी है कि करीब एक दर्जन चेहरों में फेरबदल हो सकता है, जिसमें 6 खाली पदों को भरने के साथ-साथ कुछ पुराने चेहरों को संगठन में वापस भेजा जा सकता है।
दरअसल, ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों ने बीजेपी को सबक सिखाया है कि सोशल इंजीनियरिंग में थोड़ी सी भी चूक भारी पड़ सकती है। इसीलिए अब ओबीसी की कुर्मी जाति से आने वाले पंकज चौधरी को कमान दी गई है। इस विस्तार में कुर्मी, पासी, शाक्य और मौर्य समुदायों को भारी प्रतिनिधित्व देने की तैयारी है ताकि पिछड़े और दलित वोट बैंक में लगी सेंध को भरा जा सके। साथ ही, ब्राह्मण समुदाय की कथित नाराजगी को दूर करने के लिए कुछ बड़े ब्राह्मण चेहरों को भी कैबिनेट या संगठन के ऊंचे पदों पर बिठाया जा सकता है। हालांकि मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष दोनों ही पूर्वी उत्तर प्रदेश से आते हैं, ऐसे में इस बार के विस्तार में पश्चिमी उत्तर प्रदेश को बड़ी सौगात मिल सकती है। पश्चिम के जाट और गुर्जर समीकरणों को साधने के लिए वहां के कद्दावर नेताओं को कैबिनेट में जगह मिल सकती है। साथ ही, कई राज्यमंत्रियों को उनके अच्छे काम का इनाम देते हुए स्वतंत्र प्रभार का दर्जा दिया जा सकता है।
आपको बता दें सिर्फ मंत्री ही नहीं, बीजेपी अपने उन जमीनी कार्यकर्ताओं को भी खुश करने के मूड में है जो लंबे समय से पद की आस लगाए बैठे हैं। उत्तर प्रदेश के विभिन्न निगमों, आयोगों और बोर्डों में जल्द ही बड़ी नियुक्तियां होने वाली हैं। हाल ही में नगर निकायों में मनोनीत सदस्यों की नियुक्ति इसी बड़े प्लान का छोटा सा हिस्सा थी। ऐसे में आप भी तैयार हो जाइए, क्योंकि अगले 15 दिनों के भीतर उत्तर प्रदेश की राजनीति का नक्शा बदलने वाला है। ये सीक्रेट रिपोर्ट और बैठकों का निचोड़ अब जमीन पर दिखने वाला है। बीजेपी का लक्ष्य साफ है कि 2027 में सत्ता की हैट्रिक लगाकर एक ऐसा इतिहास रचना जिसे दशकों तक याद रखा जाए। ऐसे में सवाल ये भी उठ रहे हैं कि क्या योगी आदित्यनाथ की नई टीम विपक्ष के PDA को पस्त कर पाएगी? क्या ये नए चेहरे जनता का विश्वास दोबारा जीत पाएंगे? इन सभी सवालों के जवाब जल्द ही राजभवन में होने वाली शपथ ग्रहण समारोह की तस्वीरों के साथ साफ हो जाएंगे।

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