दभोई में नवली नवरात्रि ढोल की थाप की तैयारियां शुरू

दभोई : दभोई तालुका के ग्रामीण क्षेत्रों से आयोजक वाद्य यंत्रों की मरम्मत कराने दभोई आ गए हैं। नवली नवरात्रि का पावन पर्व अब बस कुछ ही दिन दूर है। नवरात्रि के पर्व पर भक्त भक्ति और शक्ति की आराधना में लीन होंगे। तब माताजी के गरबा में नर्तक सूरों की ताल पर नृत्य करेंगे। इन सूरों की ताल सुरीली निकले, इसके लिए ढोल-नगाड़ों सहित वाद्य यंत्रों को तैयार रखना पड़ता है। इसके लिए समूह के कारीगर और युवा इनकी मरम्मत कराने दभोई पहुंचते हैं और नवरात्रि पर्व के अवसर पर इन्हें शीघ्रता से मरम्मत कर भजन मंडली को सौंप दिया जाता है। चूंकि माताजी की स्थापना भी होनी है, इसलिए समूह के आयोजक मां अंबा जगदंबा की मूर्तियां भी खरीदकर उनके स्थान पर स्थापित करते हैं। इसी कारण उन्होंने मां अंबा जगदंबा की मूर्तियां भी बुक कर ली हैं। दभोई में पिछले दिनों गली-मोहल्लों में गरबे आयोजित किए गए थे। जो पिछले पच्चीस वर्षों से बंद पड़ा है। प्राचीन और गली के गरबा का जो मजा पहले कहा जाता था। वह अब लुप्त होता जा रहा है, असली गरबा संस्कृति अब लुप्त होती जा रही है। वर्तमान में महंगाई के कारण नगरवासी चाहते हैं कि गली के गरबे पहले की तरह शुरू हो जाएं। ताकि खर्च भी कम हो और गरबे रात में जल्दी पूरे हो सकें। गरबा प्रेमी चाह रहे हैं कि इस वर्ष से ऐसा आयोजन शुरू किया जाए। जिससे नगर में व्यापार प्रभावित न हो क्योंकि गरबा वेला संपन्न होने के बाद सभी लोग अपने-अपने घर जल्दी पहुंच जाते हैं। और वेला सुबह उठ सकते हैं। जिससे नगर की दुकानें भी नियमित रूप से जल्दी खुल रही हैं। व्यापारी वर्ग और अभिभावक भी इसके लिए अपनी तत्परता दिखा रहे हैं। वर्षों पहले होने वाले गली के गरबे बंद होने से ऐसा लग रहा है कि असली गरबा संस्कृति लुप्त हो गई है। फिर, माँ शक्ति की आराधना के पर्व के असली। 

रिपोर्टर : लाल भाई भठीयारा

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