पश्चिमी संस्कृति के वैलेंटाइन डे के बीच हीरा कड़िया और तेन रानी की अमर प्रेम कहानी आज भी जिंदा

वड़ोदरा : पश्चिमी संस्कृति के वैलेंटाइन डे के बीच हीरा कड़िया और तेन रानी की अमर प्रेम कहानी आज भी जिंदा है दभोई 'वैलेंटाइन डे' आज 14 फरवरी को पूरी दुनिया में मनाया जा रहा है। पश्चिमी देशों से शुरू हुई यह परंपरा अब भारत में भी फैल चुकी है, जहां प्रेमी जोड़े अपनों के प्रति प्रेम की भावनाओं का इजहार करते हैं। हालांकि, ऐतिहासिक नगर दभोई में वैलेंटाइन डे के जश्न को कुछ खास और इतिहास के पन्नों से जोड़कर देखा जाता है। 500 साल पुराना अमर प्रेम : हीरा कड़िया और तेन रानी
जहां आज के दौर में लोग महंगे तोहफे देकर अपने प्रेम का इजहार करते हैं, वहीं दभोई में 500 साल से भी ज्यादा पुरानी एक अमर प्रेम कहानी आज भी अपने स्मारकों के जरिए जिंदा है। दभोई के विश्व प्रसिद्ध किले के निर्माण से जुड़ी मूर्तिकार हीरा कड़िया और तेन रानी की प्रेम कहानी आज भी लोगों के आकर्षण का केंद्र है। हीरा कड़िया द्वारा अपनी प्रेमिका दस रानी की याद में बनवाए गए स्मारक और हीरा गेट आज भी इस अटूट प्रेम के साक्षी हैं। महंगे गुलाब और बदलता ट्रेंड वैलेंटाइन डे के मौके पर सुबह से ही दभोई के बाजारों में चहल-पहल रही। बाजार में लाल गुलाब के आसमान छूते दामों के बावजूद प्रेमी जोड़ों ने कीमत की परवाह किए बिना अपने पार्टनर के लिए फूल और उपहार खरीदे। हालांकि समय के साथ जश्न मनाने का तरीका भी बदल रहा है। नया ट्रेंडः अब सिर्फ फूल या उपहार देने की बजाय युवाओं में होटलों और फार्महाउसों पर पार्टियां करने का ट्रेंड बढ़ा है।
आगंतुकः कई जोड़े इस खास दिन पर दभोई के ऐतिहासिक किले और हीरा बाजार में घूमते नजर आए, जहां वे इस ऐतिहासिक धरोहर के साक्षी बने और एक-दूसरे के प्रति अपने प्रेम का इजहार किया। ऐतिहासिक धरोहरों को समेटे दभोई में आधुनिकता और इतिहास का यह अनूठा संगम वैलेंटाइन डे को और भी खास बना देता है।

रिपोर्टर : लाल भाई भठीयारा

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