वैकोम मुहम्मद बशीर: बेयपोर सुल्तान और मानवीय संवेदनाओं के लेखक

आज 21 जनवरी को हम महान मलयालम लेखक वैकोम मुहम्मद बशीर का जन्मदिवस मनाते हैं। उनका जन्म 21 जनवरी 1908 को केरल के वैकोम क्षेत्र में हुआ था। वे न सिर्फ एक प्रसिद्ध साहित्यकार थे, बल्कि स्वतंत्रता सेनानी और मानवीय मूल्यों के समर्थक भी थे।

वैकोम मुहम्मद बशीर को उनके सरल, सच्चे और आम आदमी से जुड़े लेखन के लिए जाना जाता है। उनकी कहानियाँ जीवन की छोटी-छोटी बातों में छिपे बड़े सच को बेहद सहज भाषा में सामने लाती हैं। उन्होंने अपने लेखन में प्रेम, गरीबी, संघर्ष, हास्य और मानवीय संवेदनाओं को बहुत ही खूबसूरती से उकेरा।

उनकी प्रमुख रचनाओं में ‘बाल्यकाल सखी’, ‘प्रेमलेखनम’, ‘पाथुम्मायुदे आडु’ (पाथुम्मा की बकरी) और ‘मथिलुकल’ शामिल हैं। इन रचनाओं ने मलयालम साहित्य को एक नई पहचान दी।

साहित्य के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें पद्म श्री सहित कई सम्मान मिले। आज भी उनका साहित्य पाठकों के दिलों में जीवित है।

वैकोम मुहम्मद बशीर को प्रेम से ‘बेयपोर सुल्तान’ भी कहा जाता है, केवल मलयालम साहित्य के महान लेखक ही नहीं थे, बल्कि एक सच्चे मानवतावादी और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के सक्रिय सेनानी भी थे। उन्होंने अपने जीवन में जेल की यातनाएँ झेलीं और आज़ादी की लड़ाई में हिस्सा लिया, जिसका प्रभाव उनकी रचनाओं में साफ़ दिखाई देता है। 

बशीर का साहित्य धर्म, जाति और वर्ग से ऊपर उठकर इंसानियत, प्रेम और समानता की बात करता है। उनका लेखन आज भी हमें सच्चाई, करुणा और स्वतंत्र सोच की राह दिखाता है, और यही उन्हें एक कालजयी लेखक बनाता है।

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