वाराणसी में मौत बांट रहे अवैध नशा मुक्ति केंद्र: 50 सेंटरों के पास पंजीकरण नहीं, प्रशासन सख्त-

 

 वाराणसी में मौत बांट रहे अवैध नशा मुक्ति केंद्र: 50 सेंटरों के पास पंजीकरण नहीं, प्रशासन सख्त-

वाराणसी। धर्म और अध्यात्म की नगरी वाराणसी में नशा छुड़ाने के नाम पर 'अवैध कारोबार' का बड़ा खुलासा हुआ है। जिले में लगभग 50 नशा मुक्ति केंद्र बिना किसी कानूनी पंजीकरण और मानकों के संचालित हो रहे हैं। हाल ही में सारनाथ के एक केंद्र में युवक की पीट-पीटकर हुई हत्या के बाद प्रशासन जागा है और अब इन केंद्रों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।

 सारनाथ की घटना ने खोली पोल-

दरअसल, सारनाथ थाना क्षेत्र के 'जन सुधार नशा मुक्ति केंद्र' में आदित्य गोस्वामी नामक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। पुलिस जांच में पता चला कि युवक की बेरहमी से पिटाई की गई थी। चौंकाने वाली बात यह है कि यह केंद्र पूरी तरह अवैध था। इस मामले में संचालक समेत तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इस घटना ने जिले में चल रहे अन्य अवैध केंद्रों की पोल खोल दी है।

 14 केंद्र चिह्नित, 14 बिंदुओं पर जांच जारी-

क्षेत्रीय मद्यनिषेध एवं समाजोत्थान अधिकारी निर्मालिका सिंह के अनुसार, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार की अध्यक्षता में एक विशेष टीम गठित की गई है। प्रशासन ने अब तक 14 ऐसे केंद्रों को चिह्नित किया है जो पूरी तरह अवैध हैं और उन्हें नोटिस जारी किया गया है। वर्तमान में पूरे जिले में केवल दो केंद्र (मंडुवाडीह और कोदोपुर) ही ऐसे हैं, जिन्हें भारत सरकार से मान्यता प्राप्त है। सारनाथ, भोजूबीर, पांडेयपुर और चोलापुर जैसे क्षेत्रों में मानक विहीन केंद्र धड़ल्ले से चल रहे हैं।

 क्या हैं अनिवार्य मानक?

नियमों के मुताबिक, 15 बेड के केंद्र पर कम से कम 15 कर्मचारी होने चाहिए। साथ ही 400 स्क्वायर फीट जगह, प्राथमिक उपचार कक्ष, आपातकालीन दवाएं और किसी अस्पताल से टाइ-अप होना अनिवार्य है। सबसे महत्वपूर्ण नियम यह है कि केंद्र में किसी भी मरीज के साथ मारपीट नहीं की जा सकती।

फिलहाल, प्रशासन इन केंद्रों की ऑडिट रिपोर्ट खंगाल रहा है। जांच पूरी होते ही इन 'यातना गृह' बन चुके अवैध केंद्रों को सील करने और संचालकों पर कठोर कार्रवाई की तैयारी है।

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