वाशिम में मूकनायक,डॉ.बाबासाहेब अंबेडकर पत्रकार दिवस मनाया गया
वाशिम - अजय बहुजन हिताय सार्वजनिक ग्रंथालय में मूकनायक, डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर पत्रकार दिवस मनाया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता दैनिक जनमाध्यम के जिला प्रतिनिधि पप्पू घुगे ने की, जबकि वरिष्ठ पत्रकार बबनराव खिल्लारे, सुनील कांबले, प्रवीण पट्टेबहादुर, युवा पत्रकार पूजा बंसोड़ और अजय बहुजन हिताय बहुजन सार्वजनिक ग्रंथालय के संस्थापक सचिव समाधान अवचार मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे। शुरू में,मौजूद गणमान्य लोगों ने भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की प्रतिमा पर फूल चढ़ाए। बाद में पप्पू घुगे ने संबोधन मे कहा कि डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर ने सबसे पहले 31 जनवरी 1920 को मूकनायक नाम की एक पाक्षिक मैगज़ीन शुरू की थी, ताकि मूकनायक के ज़रिए समाज की तकलीफ़ों को लोगों तक पहुंचाया जा सके और अन्याय और ज़ुल्म को सामने लाया जा सके। उसके बाद उन्होंने कहा बहिष्कृत भारत, प्रबुद्ध भारत और जनता शुरू किए। डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर ने कहा कि अगर कोई आंदोलन चलाना है और उसे तेज़ करना है, तो अखबार की ज़रूरत होती है। नहीं तो उस आंदोलन की हालत एक बिना पंख वाली पक्षी जैसी होती है। वहीं, बबनराव खिल्लारे ने भी डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की पत्रकारिता के बारे में बताया और आज के पत्रकारों की पत्रकारिता के बारे में बताया, और उन्हें समाज की तकलीफ़ों को मीडिया के ज़रिए पेश करके न्याय करना चाहिए। फिर, सुनील कांबले ने कहा कि पत्रकारिता करते समय कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है और समाज को न्याय देना पड़ता है। इसलिए, एक पत्रकार को निडर और साफ़ होना चाहिए। बाद में, समाधान अवचार ने प्रोग्राम चेयरपर्सन पप्पू घुगे, बबनराव खिल्लारे, सुनील कांबले, प्रवीण पट्टेबहादुर और पूजा बंसोड़ को शॉल, गुलदस्ते और मुक नायक की किताबें देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का सूत्र संचालन राजकुमार पडघन ने किया, जबकि धन्यवाद प्रवीण पट्टेबहादुर ने दिया। प्रोग्राम में डायमंड कोचिंग क्लासेस के डायरेक्टर माधव डोंगरदिवे, चंचलबाई गुंजकर, ज्योत्सना अवचार, संध्या सभादिंडे, के.डी. जाधव, विश्वनाथ पडघन, शंकर गुड्डे, मधुकर हिवराले, अजय अवचार, असलम शाह, केदार कबाड़े, अविनाश कांबले, चंद्रकला वाडकर, विशाखा बर्डे, प्राची बर्डे, इंदिराबाई इंकार, सिमा पालेकर और नंदा अवचार समेत कई लोग शामिल हुए।
रिपोर्टर - नागेश अवचार

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