केंचुओं से तैयार जैविक खाद, वर्मी कंपोस्ट कैसे बनाएं

आजकल किसानों के बीच जैविक खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है। रासायनिक उर्वरकों के लगातार उपयोग से मिट्टी की उर्वरता घटती जा रही है, जिससे फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों प्रभावित होते हैं। ऐसे में वर्मी कंपोस्ट एक प्रभावी और प्राकृतिक विकल्प के रूप में उभरकर सामने आया है। यह न केवल मिट्टी की सेहत सुधारता है, बल्कि फसलों की पैदावार और गुणवत्ता भी बढ़ाता है।

वर्मी कंपोस्ट क्या है?

वर्मी कंपोस्ट केंचुओं द्वारा तैयार की जाने वाली जैविक खाद है। इसमें केंचुए जैविक कचरे जैसे गोबर, सूखी पत्तियां, फसल अवशेष और सब्जियों के छिलकों को खाकर उसे पोषक तत्वों से भरपूर, काली और भुरभुरी खाद में बदल देते हैं।

इस खाद में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश और कई सूक्ष्म पोषक तत्व प्राकृतिक रूप से मौजूद होते हैं। यह मिट्टी की संरचना को सुधारती है, जल धारण क्षमता बढ़ाती है और पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करती है।

वर्मी कंपोस्ट बनाने की पूरी प्रक्रिया

1. बेड या गड्ढे की तैयारी

सबसे पहले 10 फीट लंबा, 3-4 फीट चौड़ा और लगभग 1.5-2 फीट गहरा बेड तैयार करें। इसे ईंट, सीमेंट या एचडीपीई प्लास्टिक शीट से बनाया जा सकता है। बाजार में तैयार वर्मी बैग भी उपलब्ध हैं।
बेड के नीचे 2-3 इंच रेत या बालू की परत बिछाएं, ताकि अतिरिक्त पानी आसानी से निकल सके।

2. सही नस्ल के केंचुए का चयन

वर्मी कंपोस्ट के लिए Eisenia fetida (रेड विगलर) प्रजाति सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
1 वर्ग मीटर बेड के लिए लगभग 1 से 1.5 किलो (करीब 1000–1500 केंचुए) पर्याप्त होते हैं। इन्हें कृषि विज्ञान केंद्र या विश्वसनीय स्रोत से खरीदा जा सकता है।

3. बेस लेयर तैयार करना

सबसे नीचे 3-4 इंच सूखी पत्तियां, भूसा, कागज के टुकड़े या फसल अवशेष बिछाएं। यह केंचुओं के लिए आरामदायक वातावरण तैयार करता है और हवा के संचार में मदद करता है।

4. जैविक सामग्री भरना

ताजा गोबर (गाय या भैंस का) 15-20 दिन पहले पानी में भिगोकर आंशिक रूप से सड़ा लें। इसके बाद 6-8 इंच मोटी परत बेड में डालें।
ऊपर से सब्जी-फल के छिलके, हरी घास, पत्तियां और खरपतवार मिलाएं। ध्यान रखें कि मांस, तेल, प्लास्टिक या रासायनिक पदार्थ बिल्कुल न डालें।

5. नमी बनाए रखना

वर्मी कंपोस्ट में नमी का स्तर बहुत महत्वपूर्ण है। बेड को हमेशा हल्का नम रखें। सप्ताह में 2-3 बार पानी का छिड़काव करें। ज्यादा पानी भरने से केंचुए मर सकते हैं, इसलिए जल निकासी का ध्यान रखें।

6. केंचुए डालना और ढकना

जब जैविक सामग्री 15-20 दिन में हल्की सड़ जाए, तब केंचुए उसमें छोड़ दें। ऊपर से सूखी घास, बोरी या गन्ने के पत्तों से ढक दें ताकि अंधेरा और नमी बनी रहे।

7. देखभाल और निगरानी

हर 7-10 दिन में ऊपरी परत को हल्के हाथों से पलटें। यदि सामग्री सूखी लगे तो पानी का छिड़काव करें। कीट लगने पर नीम का घोल छिड़क सकते हैं।

खाद तैयार होने का समय और पहचान

लगभग 45-60 दिनों में वर्मी कंपोस्ट तैयार हो जाती है। यह काली, भुरभुरी और बिना किसी बदबू के मिट्टी जैसी दिखती है। तैयार खाद को छलनी से छान लें और केंचुओं को अलग करके फिर से बेड में डाल दें।

इस तैयार खाद को प्रति एकड़ 2-5 क्विंटल की मात्रा में खेत में उपयोग किया जा सकता है।

वर्मी कंपोस्ट के फायदे

मिट्टी की उर्वरता और संरचना में सुधार
फसलों की पैदावार में वृद्धि
पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत
रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम
जैविक उत्पादों की बेहतर बाजार कीमत

वर्मी कंपोस्ट कम लागत, कम जोखिम और अधिक लाभ देने वाली तकनीक है। यह न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि किसान इस तकनीक को अपनाएं, तो वे स्वस्थ मिट्टी और बेहतर उत्पादन की दिशा में एक मजबूत कदम उठा सकते हैं।

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