UP -2027 के विधानसभा चुनाव मेें कांग्रेस ने खोले घोड़े ,अब होगा असली खेला

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की लड़ाई अभी से दिलचस्प होती जा रही है.. बीजेपी के बाद कांग्रेस ने भी यूपी में अपने 133 जिला और महानगर अध्यक्षों के नामों का ऐलान कर दिया है... इसके साथ ही सवाल ये उठता है कि राहुल गांधी के सामाजिक न्याय के एजेंडे पर प्रदेश अध्यक्ष अजय राय की टीम कितनी फिट बैठती है, और क्या कांग्रेस यूपी की बंजर जमीन पर फिर से सियासी फसल लहरा पाएगी?2024 के लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने संगठन में बड़ा फेरबदल किया था। पार्टी ने सभी फ्रंटल संगठनों, जिला अध्यक्षों और शहर अध्यक्षों को भंग कर दिया था, और 100 दिनों में नए सिरे से संगठन बनाने की योजना बनाई थी। प्रियंका गांधी और राहुल गांधी के करीबी नेताओं को जगह दी गई है, और साथ ही राहुल गांधी के सामाजिक न्याय के एजेंडे को भी मजबूत किया गया है।जैसे -
- यूपी में 133 जिला और शहर अध्यक्षों में से 85 ओबीसी, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय से हैं
- यानी करीब 65% पदों पर इन समुदायों का कब्जा है
- ओबीसी से 48, दलित से 20 और मुस्लिम समुदाय से 32 लोग शामिल हैं
- 49 सवर्ण जातियों में से 27 ब्राह्मण नेताओं को जिला और शहर अध्यक्ष बनाया गया है कुल सवर्ण नेताओं का 35% हैं
- इसके बाद ठाकुर, वैश्य, कायस्थ और भूमिहार समाज से भी प्रतिनिधित्व दिया गया है
वही इसके अलावा कांग्रेस ने 'पीडीए फार्मूला' यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय पर ध्यान केंद्रित किया है, ठीक वही रणनीति सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपनाई है। बीजेपी भी इसी फार्मूले पर काम कर रही है, और अब कांग्रेस भी यूपी में अपनी खोई जमीन को वापस हासिल करने की कोशिश में है ..इसके अलावा उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी के प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता... इसीलिए -
- पार्टी ने 133 जिला और शहर अध्यक्षों में से कई नाम प्रियंका गांधी की टीम से चुने हैं
- मथुरा, आगरा, लखनऊ, कानपुर जैसे प्रमुख जिलों में प्रियंका के करीबी नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है
- कांग्रेस ने युवा और अनुभवी चेहरों को प्रमुखता दी है
- 133 जिला और शहर अध्यक्षों में से 84 नेताओं की उम्र 21 से 50 साल के बीच के है
- जिनमें से 25 नेता 21 से 40 साल के हैं, जबकि 59 नेता 41 से 50 साल के हैं
यानी कि देखा जाए तो कांग्रेस ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश में एक नई रणनीति के साथ कदम रखा है, जिसमें राहुल गांधी के सामाजिक न्याय के एजेंडे को मुख्य धारा में रखा गया है।अब यह देखना होगा कि यह सियासी समीकरण बीजेपी और सपा के लिए कितनी चुनौती बनता है, लेकिन कांग्रेस इस बार पूरी तैयारी के साथ 2027 में अपनी ताकत साबित करने के लिए मैदान में उतरी है..
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