तीर्थंकर बालक के गर्भ में आते ही , मां ने देखे 16 स्वप्न, राजा नाभिराय ने समझाया सपनों का फलादेश

गंज बासौदा :  पंच कल्याणक महोत्सव के दूसरे दिन प्रातः नित्य महा मस्तकाभिषेक और शांतिधारा के उपरांत गर्भ कल्याणक पूजन आयोजित हुई, तो वहीं कार्यक्रम स्थल अयोध्या नगरी में प्रातः 8:15 से नगर में विराजमान मुनि श्री विमल सागर जी एवं मुनि श्री अनंत सागर जी महाराज के मंगल देशना सुनने का अवसर समाजजन को प्राप्त हुआ। मुनि श्री ने द्वारा गर्भ संस्कार का महत्व और तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के जीवन पर आधारित प्रवचन श्रद्धालुओं को दिए। दोपहर 12 बजे भगवान के माता पिता बनने वाले सौभाग्य शाली प्रमुख पात्र श्री मति निर्मला - श्री सुनील कुमार जी जैन (बरबाई वाला परिवार) को समाज जन द्वारा ससम्मान रथ पर बैठाकर आयोजन स्थल अयोध्या नगरी लाया गया जहां तीर्थंकर बालक की माता मां मरुदेवी की गोद भराई का कार्यक्रम आयोजित हुआ। जिसमें मुख्य पात्रों के साथ सभी इंद्र इंद्राणी और समाज के प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे। वहीं दोपहर 01 बजे से श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में नव निर्मित चौबीसी वेदी की शुद्धि के लिए सौधर्म इंद्र अपनी इंद्राणी के साथ ऐरावत हाथी पर बैठकर एवं शेष प्रमुख पात्र अपने अपने रथों पर बैठकर जुलूस के साथ त्योंदा रोड शांतिनगर स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर पहुंचे। जहां ब्र. विनय भैय्या ने मंत्रोच्चार द्वारा वेदी शुद्धि एवं नवीन जिनालय शुद्धि कार्यक्रम संपन्न कराया। फिर मंदिर जी की शिखर शुद्धि प्रतिष्ठा संस्कार आयोजित हुआ।

शाम को महा आरती के पुण्यार्जक बनने वाले सौभाग्य शाली परिवार महेश कुमार ,मुकेश कुमार, संस्कार कुमार जैन (संस्कार बिल्डिंग परिवार) को प्राप्त हुआ। पुण्यार्जक परिवार के निज निवास सिटी सेंटर से ऐरावत हाथी के साथ बग्गी और गाजे बाजे लेकर महा आरती प्रारंभ हुई जो कि प्रमुख मार्गों से होते हुए आयोजन स्थल पहुंची। कार्यक्रम स्थल पर मंगल आरती के उपरांत सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए , जिसमें महाराजा नाभिराय का राज दरबार लगा जिसमें सभासदों द्वारा तत्व चर्चा हुई और राज दरबार के प्रधान मंत्री एवं सेनापति से राज्य की स्थिति के बारे में चर्चा हुई। माता मरुदेवी ने राजा नाभिराय को अपने सोलह सपनों के बारे में बताते हुए फलादेश के बारे में विस्तार से जानना चाहा, तो वहीं राजा नाभिराय द्वारा शुभ संकेत को जानते हुए रानी मरुदेवी को सपनों के फलादेश को विस्तार से समझाया। जिसका सचित्र चित्रण मंच पर बनी बड़ी एल ई डी स्क्रीन पर हुआ। माता के गर्भ में महा पुण्यशाली जीव को आया जानकर राज दरबार में खुशी की लहर दौड़ गई और राज दरबार में छप्पन कुमारी देवियों द्वारा नृत्य गान बधाई दी गई और तीर्थंकर बालक की माता को उपहार भेंट किए। मुनि श्री विमल सागर जी महाराज की अष्टांका महापर्व में चल रही है कठिन तपस्चर्या वैसे तो सभी दिगंबर जैन मुनि कठिन तपस्चर्या के लिए जग विख्यात हैं, तो वहीं नगर में विराजमान मुनि श्री विमल सागर जी महाराज अष्टांका महापर्व में लगातार 72 घंटों से बिना आहार पानी ग्रहण कर अपनी दैनिक क्रियाएं बिना किसी रुकावट के पूर्ण कर रहे हैं। मुनि श्री विमल सागर जी महाराज पूर्व में भी अष्टांका महापर्व में आठ आठ दिन तक बिना आहार एवं पानी ग्रहण कर निर्जला उपवास कर अपनी देह को तपस्या में तपा कर कर्मों की निर्जरा करने के लिए जाने जाते हैं।


रिपोर्टर : हेमंत आनंद 

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