कौशल प्रशिक्षण से आत्मनिर्भरता की ओर — सुनील विश्वकर्मा की प्रेरणादायक यात्रा
विदिशा : कौशल प्रशिक्षण से कैसे आत्मनिर्भर बना जा सकता है, इसका जीता-जागता उदाहरण हैं बासौदा के सुनील विश्वकर्मा। सुनील विश्वकर्मा, पिता सुरेश विश्वकर्मा ने वर्ष 2018 में आईटीआई से इलेक्ट्रीशियन व्यवसाय में प्रशिक्षण प्राप्त कर अपनी व्यावसायिक यात्रा की शुरुआत की थी। तकनीकी शिक्षा और विद्युत क्षेत्र में कार्य करने के अनुभव के दम पर वर्तमान में वे एमपीईबी, बासौदा में मीटर रीडर के रूप में कार्यरत हैं।
अपने तकनीकी ज्ञान को और अधिक विकसित करने तथा रोजगार के अतिरिक्त अवसरों का लाभ उठाने के उद्देश्य से सुनील ने सोलर टेक्नीशियन का प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूर्ण किया। इस प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने सौर ऊर्जा प्रणाली की स्थापना, संचालन एवं रखरखाव से संबंधित व्यावहारिक कौशल अर्जित किए।
सोलर टेक्नीशियन का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने सोलर इंस्टॉलेशन एवं मेंटेनेंस के कार्यों में भी अपनी भागीदारी शुरू की। इससे उन्हें अपने मौजूदा कार्य के साथ अतिरिक्त तकनीकी कार्य करने और अपनी आय बढ़ाने का अवसर मिला।
अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा
सुनील विश्वकर्मा की यह यात्रा दर्शाती है कि तकनीकी शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि नए कौशल सीखकर व्यक्ति अपनी कार्यक्षमता बढ़ा सकता है और अतिरिक्त आय के अवसर भी विकसित कर सकता है।
उनकी सफलता अन्य प्रशिक्षणार्थियों के लिए प्रेरणादायक है और यह संदेश देती है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती और नए कौशल अपनाकर रोजगार एवं स्वरोजगार के नए रास्ते खोले जा सकते हैं। सोलर टेक्नीशियन जैसे आधुनिक एवं रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम युवाओं को पारंपरिक तकनीकी ज्ञान के साथ उभरते सौर ऊर्जा क्षेत्र में भी कार्य करने के अवसर प्रदान करते हैं।
रिपोर्टर : हेमंत आनंद

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