विजय एकादशी: भक्ति, व्रत और आध्यात्मिक उन्नति का पर्व
विजय एकादशी वैष्णव परंपरा में अत्यंत पवित्र मानी जाती है। यह फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी को आती है। ‘विजय’ का अर्थ है सफलता या जीत। इस दिन का उपवास विशेष रूप से जीवन में सफलता और आध्यात्मिक प्रगति के लिए किया जाता है। इस एकादशी का पालन करने से भक्त अपने अंदर के विकार और बाधाओं को पार करके भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त करते हैं।
धार्मिक महत्व और कथा
विजय एकादशी का महत्व पुराणों में विशेष रूप से बताया गया है। इस दिन का पालन करने वाले भक्त को संसारिक बाधाओं पर विजय और अंततः वैकुंठ प्राप्ति का वरदान मिलता है। कथा के अनुसार, भगवान राम ने लंका जाने से पहले विजय एकादशी का उपवास किया था और इससे उनका युद्ध विजय के साथ संपन्न हुआ। यही कारण है कि इसे जीत और सफलता की एकादशी कहा जाता है।
कब मनाई जाती है?
विजय एकादशी फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी को आती है। उपवास एकादशी के दिन प्रातः से शुरू होता है और द्वादशी के प्रातःकाल में पारणा (उपवास समाप्त करना) किया जाता है। समय और तिथि क्षेत्र अनुसार भिन्न हो सकती है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखना उचित है।
विजय एकादशी का पालन
1. उपवास
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अधिकांश भक्त सूर्यास्त से द्वादशी प्रातः तक उपवास करते हैं।
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कुछ निर्जला उपवास रखते हैं, जबकि कुछ फलाहार (फल, दूध आदि) करते हैं।
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उपवास के दिन अनाज, दाल, प्याज, लहसुन और भारी भोजन का परहेज किया जाता है।
2. प्रातःकालीन पूजा और स्नान
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भक्त जल्दी उठकर स्नान और घर की सफाई करते हैं।
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उपवास की शुरुआत में संकल्प लेकर व्रत का पालन करने का निश्चय करते हैं।
3. भक्ति और पूजा
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भगवान विष्णु या कृष्ण को तुलसी पत्र, फूल, फल और भोग अर्पित किया जाता है।
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भक्त हरे कृष्ण महामंत्र, विष्णु सहस्रनाम और भगवद गीता का पाठ और जप करते हैं।
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कीर्तन और भजन के माध्यम से रात भर भक्ति की जाती है।
4. दान और सेवा
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जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या दान देना पुण्यकारी माना जाता है।
विजय एकादशी के लाभ
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जीवन में सफलता और आध्यात्मिक प्रगति मिलती है।
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पापों का नाश होता है।
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भगवान कृष्ण के प्रति भक्ति और सच्चाई में वृद्धि होती है।
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श्रद्धा और नियमपूर्वक उपवास करने वाले को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
विजय एकादशी केवल उपवास का दिन नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक जीवन में समर्पण, इन्द्रियों पर नियंत्रण और भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त करने का दिन है। इस दिन की भक्ति और सेवा जीवन में सच्ची जीत दिलाती है — भौतिक और आध्यात्मिक दोनों रूपों में।


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