देश का 'VIP आम'! राष्ट्रपति को जाता है तोहफा, PM भी हैं इसके दीवाने
भारत में आम को फलों का राजा कहा जाता है और देश के अलग-अलग हिस्सों में इसकी सैकड़ों किस्में उगाई जाती हैं। लेकिन कुछ आम ऐसे भी हैं जिनकी पहचान सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वे अपनी विशिष्टता और प्रतिष्ठा के लिए भी जाने जाते हैं। बिहार का जर्दालू आम इसी श्रेणी में आता है।
भागलपुर क्षेत्र में उगाया जाने वाला जर्दालू आम वर्षों से अपनी अनूठी खुशबू और बेहतरीन स्वाद के कारण चर्चा में रहा है। इसकी खास बात यह है कि यह आम बड़े पैमाने पर बाजारों में नजर नहीं आता। सीमित उत्पादन और विशेष गुणवत्ता के कारण इसे एक प्रीमियम फल माना जाता है।
जर्दालू आम के इतिहास को लेकर कई कहानियां सुनने को मिलती हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार इसकी खेती का इतिहास करीब दो शताब्दियों पुराना है। माना जाता है कि इस किस्म का पहला पेड़ एक शाही बाग में लगाया गया था, जिसके बाद धीरे-धीरे इसकी पहचान पूरे क्षेत्र में फैल गई। आज भी इस आम को बिहार की समृद्ध कृषि परंपरा का प्रतीक माना जाता है।
आकार में अपेक्षाकृत छोटा दिखने वाला यह आम अपने सुनहरे रंग, रसदार गूदे और मिठास के लिए प्रसिद्ध है। इसकी सुगंध इतनी आकर्षक होती है कि पेड़ों से लदे बागों में दूर तक इसकी महक महसूस की जा सकती है। यही वजह है कि आम प्रेमियों के बीच इसकी अलग पहचान बनी हुई है।
इस विशेष आम को राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला है। इसे भौगोलिक पहचान (GI Tag) प्राप्त हो चुकी है, जिससे इसकी विशिष्टता और मूल क्षेत्र का महत्व और बढ़ गया है। हर वर्ष आम के मौसम में बिहार सरकार की ओर से चुनिंदा जर्दालू आम देश के शीर्ष संवैधानिक पदों पर आसीन हस्तियों को भेंट किए जाते हैं।
सीमित उत्पादन होने के कारण अधिकांश लोगों को इसे चखने का अवसर नहीं मिल पाता। हालांकि हाल के वर्षों में इसकी लोकप्रियता बढ़ी है और कुछ प्रीमियम विक्रेता इसे विशेष ऑर्डर पर उपलब्ध कराने लगे हैं। इसके बावजूद जर्दालू आम आज भी एक दुर्लभ और विशिष्ट फल के रूप में पहचाना जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जीआई टैग मिलने के बाद इस आम के निर्यात और व्यावसायिक संभावनाओं में वृद्धि हुई है। किसान भी इसकी खेती को बढ़ावा देने के लिए नए प्रयास कर रहे हैं, ताकि इस अनोखी विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रखा जा सके।
जर्दालू आम केवल एक फल नहीं, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक और कृषि पहचान का हिस्सा है। वर्षों पुरानी परंपरा, अनोखा स्वाद और राष्ट्रीय स्तर पर मिली प्रतिष्ठा इसे भारत के सबसे खास आमों में शामिल करती है।
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