वायरल फीवर या स्वाइन फ्लू? लक्षण पहचानने से लेकर बचाव तक जानें जरूरी बातें
बदलते मौसम में सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार जैसी परेशानियां आम हो जाती हैं। यही वजह है कि कई बार लोग तेज बुखार और कमजोरी को भी सामान्य वायरल इंफेक्शन मानकर घर पर ही इलाज शुरू कर देते हैं। हालांकि, फ्लू के मामलों में कुछ लक्षण सामान्य वायरल फीवर से अलग और अधिक तीव्र हो सकते हैं। ऐसे में समय रहते सही पहचान और डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी हो जाता है।इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. अजय अग्रवाल, चेयरमैन, इंटरनल मेडिसिन, फोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा के मुताबिक, H1N1 फ्लू और दूसरे वायरल इंफेक्शन के लक्षणों में कुछ समानताएं जरूर होती हैं, लेकिन बीमारी की शुरुआत और उसकी तीव्रता में अंतर देखा जा सकता है।

वायरल फीवर और H1N1 फ्लू को कैसे पहचानें?
बीमारी की शुरुआत सामान्य वायरल इंफेक्शन के लक्षण कई बार धीरे-धीरे सामने आते हैं। वहीं फ्लू में व्यक्ति को अचानक तेज कमजोरी, बुखार और शरीर में दर्द महसूस हो सकता है। कुछ लोगों में कुछ ही समय के भीतर तबीयत काफी खराब लगने लगती है।

बुखार कितना तेज होता है?
वायरल फीवर में बुखार हल्का या मध्यम रह सकता है। फ्लू में बुखार अपेक्षाकृत अधिक तेज हो सकता है और इसके साथ कंपकंपी या काफी कमजोरी महसूस हो सकती है। हालांकि, केवल तापमान देखकर H1N1 की पुष्टि नहीं की जा सकती।शरीर में दर्द और थकानफ्लू के दौरान मांसपेशियों और पूरे शरीर में दर्द काफी ज्यादा महसूस हो सकता है। मरीज को सामान्य काम करने में भी थकान और कमजोरी लग सकती है। साधारण वायरल इंफेक्शन में भी बदन दर्द हो सकता है, लेकिन इसकी तीव्रता हर व्यक्ति में अलग होती है।खांसी और सांस से जुड़ी परेशानीसामान्य वायरल इंफेक्शन में नाक बंद होना, छींक, गले में खराश या हल्की खांसी जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं। H1N1 फ्लू में सूखी खांसी और गले में दर्द अधिक परेशान कर सकता है। गंभीर स्थिति में सांस लेने में परेशानी या सीने में असहजता भी हो सकती है।ध्यान रखें कि इन लक्षणों के आधार पर घर पर खुद H1N1 की पक्की पहचान करना संभव नहीं है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर जांच की सलाह दे सकते हैं।

H1N1 फ्लू से बचने के लिए क्या करें?
फ्लू संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या सांस से निकलने वाली संक्रमित बूंदों के संपर्क में आने से फैल सकता है। संक्रमण की संभावना कम करने के लिए रोजमर्रा की कुछ सावधानियां बेहद उपयोगी हैं।सालाना फ्लू वैक्सीन पर करें विचार इन्फ्लूएंजा वैक्सीन फ्लू से बचाव का महत्वपूर्ण माध्यम है। कौन-सी वैक्सीन और किस समय लगवानी चाहिए, यह उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और स्थानीय संक्रमण की स्थिति के आधार पर डॉक्टर से समझना बेहतर है।
भीड़ में मास्क का इस्तेमाल करें
भीड़भाड़ या खराब वेंटिलेशन वाली जगहों पर मास्क संक्रमण के संपर्क को कम करने में मदद कर सकता है। खांसते या छींकते समय टिश्यू या कोहनी से मुंह और नाक ढकें।

हाथ साफ रखना न भूलें
बाहर से आने के बाद और खाने से पहले हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह साफ करें। जहां पानी उपलब्ध न हो, वहां अल्कोहल-बेस्ड हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल किया जा सकता है। बिना हाथ धोए आंख, नाक या मुंह को छूने से बचें।बीमार होने पर घर पर आराम करेंबुखार, खांसी या फ्लू जैसे लक्षण होने पर अनावश्यक रूप से स्कूल, ऑफिस या भीड़ वाली जगहों पर जाने से बचें। इससे संक्रमण दूसरे लोगों तक पहुंचने की संभावना कम होती है।
किन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर बुखार या फ्लू जैसे लक्षणों के साथ सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी, होंठ या चेहरा नीला पड़ना जैसे गंभीर संकेत दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें। लगातार तेज बुखार रहने पर भी डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।साथ ही, खुद से एंटीबायोटिक लेना सही नहीं है। H1N1 एक वायरल इंफेक्शन है और एंटीबायोटिक्स वायरस के खिलाफ काम नहीं करतीं। दवा की जरूरत है या नहीं और कौन-सी दवा लेनी चाहिए, इसका फैसला डॉक्टर मरीज की स्थिति देखकर करते हैं।
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