“पाराशूट से बनी वेडिंग ड्रेस: युद्ध की राख से जन्मी प्यार की निशानी”

इतिहास के पन्नों में कुछ कहानियाँ ऐसी होती हैं, जो हमें यह अहसास दिलाती हैं कि प्यार और उम्मीद हर मुश्किल से बड़ी ताकत होती है। द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) से जुड़ी ऐसी ही एक अनोखी और भावुक करने वाली कहानी है — पाराशूट से बनी वेडिंग ड्रेस, जिसने न केवल पति की जान बचाई, बल्कि हमेशा के लिए उनके प्यार की निशानी भी बन गई।
यह कहानी है अमेरिकी एयरफोर्स पायलट मेजर क्लॉड हेन्सिंगर (Major Claude Hensinger) और उनकी जीवनसंगिनी रूथ (Ruth) की।
1944 में जापान से लौटते समय मेजर क्लॉड का B-29 विमान दुश्मन के हमले में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। आग लगने पर उन्हें विमान से छलांग लगानी पड़ी। जिस पाराशूट से उन्होंने छलांग लगाई, उसी ने उनकी जान बचाई। इतना ही नहीं, जंगल में उतरने के बाद उसी पाराशूट को उन्होंने तकिये और कंबल की तरह इस्तेमाल कर रात गुज़ारी।
युद्ध से लौटने के बाद, 1947 में जब उन्होंने रूथ से शादी का प्रस्ताव रखा, तो उन्होंने अंगूठी नहीं बल्कि वही पाराशूट उन्हें सौंपा और कहा –
“इस पाराशूट ने मेरी जान बचाई… क्या तुम इससे अपनी शादी की ड्रेस बना सकती हो?”
प्यार की डोर से सिली हुई ड्रेस
रूथ ने इस भावुक तोहफे को अपनाया और स्थानीय दर्जिन Hilda Buck की मदद से एक खूबसूरत शादी का जोड़ा तैयार करवाया।पाराशूट का नायलॉन कपड़ा ड्रेस की स्कर्ट और लंबे घेर वाले हिस्से में इस्तेमाल हुआ। रूथ ने खुद डोरियों से ड्रेस को ट्रेन-स्टाइल का रूप दिया, ताकि चलते समय पीछे लंबी स्कर्ट लहराए।
इस ड्रेस में उस पाराशूट का टैग और सिलाई के निशान भी बरकरार रखे गए, ताकि उसकी असलियत और कहानी जीवित रहे।19 जुलाई 1947 को, पेंसिल्वेनिया (अमेरिका) में दोनों ने शादी की।
ड्रेस बनी विरासत
यह ड्रेस सिर्फ एक शादी की पोशाक नहीं रही, बल्कि एक विरासत बन गई।बाद में इसे रूथ की बेटी और बहू ने भी अपनी शादी में पहना।अंततः परिवार ने इसे अमेरिका के मशहूर Smithsonian National Museum of American History को दान कर दिया, जहाँ यह आज भी प्रदर्शित है और लाखों लोग इसे देखकर प्रेरित होते हैं।
पाराशूट ड्रेस की और कहानियाँ
क्लॉड और रूथ की तरह, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कई महिलाओं ने पाराशूट से अपनी शादी की ड्रेस बनाई।Gena Turgel, जिन्हें “Bride of Belsen” कहा जाता है, ने ब्रिटिश आर्मी के पाराशूट से शादी का जोड़ा तैयार किया।
कई यूरोपीय देशों में युद्ध के बाद कपड़ों की कमी थी, इसलिए महिलाओं ने पाराशूट के मजबूत और चमकदार कपड़े से शानदार गाउन बनाए।
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